UP Assembly elections 2027: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा अध्यक्ष मायावती ने विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर जमीनी तैयारी तेज कर दी है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बूथ स्तर की रणनीति से सबक लेते हुए अब बीएसपी भी गांव-गांव और सेक्टर स्तर तक संगठन को मजबूत करने में जुट गई है. पार्टी ने हर विधानसभा क्षेत्र में प्रतिदिन दो बैठकें आयोजित करने का अभियान शुरू किया है. मायावती के निर्देशानुसार, पार्टी का लक्ष्य अब हर एक बूथ पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना है.
बूथ मजबूत करने पर फोकस
बसपा पदाधिकारियों को सेक्टर स्तर पर लगातार बैठकें करने की जिम्मेदारी दी गई है. बताया जा रहा है कि हर विधानसभा क्षेत्र में करीब 40 से 42 सेक्टर बनाए गए हैं, जहां रोजाना दो-दो बैठकें आयोजित की जा रही हैं. इन बैठकों में बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करने, पुराने समर्थकों को जोड़ने और बसपा सरकार के दौरान किए गए कार्यों को जनता तक पहुंचाने की रणनीति तैयार की जा रही है.
संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश
पार्टी नेताओं का मानना है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सफलता के पीछे बूथ मैनेजमेंट और जमीनी नेटवर्क बड़ी वजह रहा. इसी मॉडल को ध्यान में रखते हुए बसपा अब यूपी में संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश कर रही है.
आकाश आनंद की सभाओं की मांग
बीएसपी युवाओं को पार्टी से जोड़ने पर भी विशेष जोर दे रही है. पार्टी कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद की सभाएं आयोजित कराने की मांग उठाई है. माना जा रहा है कि युवा चेहरा होने के कारण आकाश आनंद के कार्यक्रमों से युवा वोटरों और कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ सकता है. लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान चक्कीपाट में हुई आकाश आनंद की सभा में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी देखने को मिली थी. उसी के बाद से संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका को और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है.
जिलाध्यक्ष ने क्या कहा?
बसपा जिलाध्यक्ष मनीष कमल ने बताया कि पार्टी कार्यकर्ता अभी से विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं. सेक्टर स्तर पर लगातार बैठकें हो रही हैं और संगठन विस्तार पर फोकस किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आकाश आनंद की सभा कराने की मांग भी पार्टी स्तर पर रखी गई है.
सूत्रों के मुताबिक, बसपा आगामी विधानसभा चुनाव में सामाजिक समीकरण साधने के लिए ब्राह्मण कार्ड पर भी दांव लगा सकती है. नौ विधानसभा सीटों में से चार सीटों पर ब्राह्मण प्रत्याशियों को मौका देने की चर्चा है.
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