modi government: मॉनसून सत्र से पहले विपक्ष में बड़ी टूट के संकेतों के बीच, केंद्र सरकार लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने वाले परिसीमन बिल को पास कराने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच गई है.

modi government: देश की राजनीति में इन दिनों एक बहुत बड़ा पावर गेम चल रहा है. 20 जुलाई से संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने वाला है और इससे ठीक पहले दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक सियासी हलचल तेज हो गई है. इस बार सारा दारोमदार शरद पवार की पार्टी पर आकर टिक गया है. राजनीतिक गलियारों से संकेत मिल रहे हैं कि शरद पवार की पार्टी लोकसभा में परिसीमन बिल का समर्थन कर सकती है. अगर ऐसा होता है तो केंद्र सरकार के लिए यह एक बहुत बड़ी जीत होगी. दरअसल, सरकार इस बिल को पास कराने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच जाएगी.
विपक्ष की एकता में दिखने लगी दरार
इस नए सियासी मोड़ ने विपक्ष के ‘इंडिया’ गठबंधन की चिंता बढ़ा दी है. कुछ समय पहले तक कांग्रेस और राहुल गांधी जिस विपक्षी एकजुटता के दम पर सरकार को घेरने का दावा कर रहे थे, वह अब कमजोर पड़ती दिख रही है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) में पहले ही फूट पड़ चुकी है. अब शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले ने भी संकेत दे दिए हैं कि नए सिरे से पेश होने वाले परिसीमन बिल पर उनकी पार्टी विचार कर सकती है. उन्होंने शर्त रखी है कि अगर सभी राज्यों में 50 फीसदी सीटें बढ़ाई जाती हैं, तो वे इसका समर्थन कर सकते हैं.
अमित शाह का वो पुराना भरोसा
देखा जाए तो सरकार सुप्रिया सुले की इस शर्त को मानने के लिए पहले से ही तैयार बैठी है. पिछले सत्र में जब इस बिल पर बहस हो रही थी, तब गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कहा था कि अगर विपक्ष 50 फीसदी सीटें बढ़ाने पर राजी हो तो वे सदन को एक घंटे के लिए रोककर इस प्रावधान को तुरंत जोड़ सकते हैं. सरकार किसी भी कीमत पर इस बार बिल को पास कराना चाहती है. यही वजह है कि महाराष्ट्र में भी बीजेपी के बड़े नेता शरद पवार की पार्टी के संपर्क में हैं, जिससे कांग्रेस कैंप में खलबली मच गई है.
क्या है सरकार का असली टारगेट
इस पूरे खेल को समझने के लिए हमें आंकड़ों के गणित को देखना होगा. सरकार ने 2026 में लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने और महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन बिल पेश किया था. पिछली बार सरकार को 298 वोट मिले थे, जबकि बिल पास कराने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी. इसलिए दो तिहाई बहुमत न होने की वजह से बिल गिर गया था. अब नए माहौल में अगर सरकार को दो तिहाई बहुमत यानी 360 का आंकड़ा छूना है, तो उसे कुछ और सांसदों का जुगाड़ करना होगा.
ऐसे पूरा होगा बहुमत का गणित
अब सवाल उठता है कि सरकार यह जादुई आंकड़ा कैसे पाएगी. राजनीति के जानकारों का कहना है कि रास्ता अब साफ होता दिख रहा है. अगर पुराने 298 सांसदों के साथ टीएमसी के 20 बागी सांसद, उद्धव गुट के 6 सांसद और शरद पवार की पार्टी के 8 सांसद मिल जाएं, तो यह संख्या 332 हो जाती है. इसके बाद अगर दक्षिण भारत की पार्टी डीएमके (DMK) के 22 सांसद भी साथ आ जाएं, तो आंकड़ा 354 तक पहुंच जाएगा. इसके बाद सरकार को सिर्फ 6 और सांसदों की जरूरत होगी, जो छोटे दलों या निर्दलीयों की मदद से आसानी से मिल जाएंगे.
