UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम तेजी से हो रहा है. ऐसे में जिन विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर का काम धीमा है या विधायक उसपर खास ध्यान नहीं दे रहे हैं. उन विधायकों पर बीजेपी ने सख्ती दिखाई है. हालात ऐसे हैं कि उन विधायकों की टिकट पर खतरा मंडराने लगा है.
UP Politics: यूपी में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर बीजेपी ने अभी से अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है. पार्टी ने अपने वर्तमान विधायकों के रिपोर्ट कार्ड तैयार करने के लिए इंटरनल सर्वे का दूसरा दौर शुरू कर दिया है. सबसे बड़ी चर्चा SIR यानी मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान को लेकर है, जिसमें ढिलाई बरतने वाले विधायकों पर टिकट कटने की तलवार लटक रही है.
लापरवाही नहीं बर्दाश्त होगी-बीजेपी
भारतीय जनता पार्टी ने साफ कह दिया है कि जनप्रतिनिधि या तो चुनाव लड़ने की अपनी मंशा स्पष्ट करें या फिर SIR के काम में पूरी ईमानदारी से जुट जाएं. किसी भी तरह की इस मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सूत्रों के अनुसार, यूपी भाजपा में 80 से ज्यादा विधायकों को चेतावनी मिली है.
बता दें, प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ भी चेतावनी दे चुके हैं. उन्होंने कहा था कि कम वोटों के अंतर से हार-जीत तय होती है और एसआईआर में की गई लापरवाही सीधे चुनाव परिणाम को प्रभावित करती है. इतना ही नहीं सीएम ने तो उन विधानसभा क्षेत्रों की जानकारी भी दी थी, जहां यह काम उम्मीद से कम हुआ. उस समय लखनऊ जिला भी शामिल था. तब सीएम के स्पष्ट निर्देश थे कि हर बूथ पर टेबल लगाई जाए, वोटर लिस्ट पहुंचाई जाए और असली व फर्जी वोटरों की जांच की जाए.
यूपी के इन विधायकों का कट सकता है टिकट!
एसआईआर पर फोकस न करने वाले विधायकों को पार्टी की तरफ से चेतावनी दी गई है कि यदि उन्होंने एसआईआर में पूरी रुचि नहीं ली, तो ऐसे लोगों के टिकट पर पार्टी विचार भी नहीं करेगी. फॉर्म जमा कराने की पावती जमा कराने के लिए पार्टी कार्यालय से विधायकों को कहा गया है. अब तक पार्टी तकरीबन 75 लाख नए वोटर बनाने के फॉर्म भरवा चुकी है.
फर्जी वोटर्स को हटाने पर भी जोर
एक बैठक में फर्जी वोटर्स को हटाने पर भी जोर दिया गया था. ऐसा दावा था कि कई जगहों पर एक ही घर में 50 से 80 वोट दर्ज हैं. ऐसे फर्जी नामों को हटाना जरूरी है. कार्यकर्ताओं को सरल ऐप के जरिए संदिग्ध वोटर्स की पहचान करने और फॉर्म-7 से आपत्ति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे. नए वोटर्स को जोड़ने के लिए फॉर्म-6 भरने पर भी फोकस किया गया था.
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