Nagpur Municipal Corporation Election: नागपुर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस और NCP-SP अलग चुनाव लड़ेंगे, जिससे विपक्षी गठबंधन में मतभेद उजागर हुए हैं. BJP और शिवसेना की महायुति ने उम्मीदवार तय कर चुनावी मैदान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है.
Nagpur Municipal Corporation Election: नागपुर में आगामी नगर निगम चुनाव में मुख्य विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाड़ी (MVA) के घटक दल कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) अलग-अलग मैदान में उतरेंगे. NCP-SP ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि उसे 15 सीटें नहीं दी गई हैं, जबकि गठबंधन के तहत साझा सीटों पर सहमति बननी थी. नागपुर में कुल 151 सीटों पर चुनाव 15 जनवरी 2026 को होंगे, जबकि मतगणना 16 जनवरी को तय की गई है. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 दिसंबर है और नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 2 जनवरी है. फाइनल उम्मीदवारों की सूची 3 जनवरी को जारी होगी.
कांग्रेस भाजपा की मदद करना चाहती है
NCP-SP के नागपुर इकाई अध्यक्ष दुनेश्वर पेठे ने बताया कि कांग्रेस नेताओं के साथ बातचीत सोमवार रात तक जारी रही, लेकिन बाद में फोन कॉल का जवाब नहीं मिला. पेठे ने कहा कि शुरुआत में NCP-SP ने 25 सीटें मांगी थीं, लेकिन 15 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए सहमति दे दी है. इसके बावजूद कांग्रेस ने सहयोग करने से इनकार किया. NCP-SP का कहना है कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस भाजपा की मदद करना चाहती है.
2017 के नागपुर निकाय चुनाव में BJP ने 108 सीटें, कांग्रेस ने 28, BSP ने 10, शिवसेना ने 2 और NCP ने 1 सीट जीती थी. इस बार बीजेपी और शिंदे शिवसेना ने महापालिका की 151 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. BJP अधिकतम 143 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि शिवसेना के लिए केवल 8 सीटें छोड़ी गई हैं.
अविनाश परडिकर को टिकट नहीं मिला
NCP के अलग चुनाव लड़ने के फैसले से पार्टी कार्यालय में नाराजगी भी देखी गई है. नागपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं ने गणेश पेठ क्षेत्र में NCP कार्यालय में तोड़फोड़ की है. यह घटना तब हुई जब अविनाश परडिकर को टिकट नहीं मिला है. पार्टी के नगर प्रमुख अनिल अहिरकर ने कहा कि एक सीट के लिए कई उम्मीदवार थे और केवल एक को ही टिकट मिल सकता था. उन्होंने कहा कि पार्टी ने सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास किया है.
इस तरह नागपुर में कांग्रेस और NCP-SP के बीच मतभेद सामने आए हैं. BJP और शिवसेना की महायुति सीटों पर उम्मीदवार तय कर चुकी है, वहीं विपक्षी दलों के बीच सहयोग के अभाव ने चुनावी मैदान को और रोचक और चुनौतीपूर्ण बना दिया है. आगामी चुनाव में किसकी ताकत कितनी होगी, यह 15 जनवरी को ही साफ होगा.
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