संसद में मानसून सत्र का दो दिन विपक्ष के हंगामे के बीच में गुजरा है. बता दें कि तीसरे दिन संसद में हालत ऐसे ही देखने को मिले हैं. विपक्ष बार-बार परीक्षा विवाद और दिल्ली में चल रहे CJP प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने वाले मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा है. इसी कारण से तीसरे दिन भी लोकसभा कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चली थी और उसे 12 बजे के लिए स्थगित कर दिया गया था.
कई रिपोर्टों से यह खबर सामने आई है कि राज्ससभा के विपक्षी नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा के चेयरमेन से मुलाकात की है, जिसमें उन्होंने सदन में हुए गतिरोध को खत्म करने की डिमांड की है. उन्होंने इस मुलाकात में कई विकल्पों पर बातचीत की है. खरगे ने स्पष्ट किया है कि पहले शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे, उसी के बाद वह संसद में चर्चा के लिए तैयार होंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान नहीं करती है. वह बस विपक्ष की बातों को दबाने की कोशिश करती है. यह लोकतांत्रिक नहीं बल्कि तानाशाही की सरकार है. संसद के सदस्यों को कोई भी महत्व नहीं दिया गया है. नेताओं को छात्रों को डराने की कोशिश की गई. आज जो विपक्षी नेताओं के साथ व्यवहार किया गया है. वह बेहद ही खराब है. अगर बड़े नेताओं को इस तरह कुचलने की कोशिश होगी, तो लोग तो सड़क पर उतरेंगे. हम डरने वालों में से तो नहीं है. लोकतंत्र मर्यादा को कमजोर कर रही है. लोकतंत्र की मर्यादा को कमजोर किया जा रहा है. विपक्ष को सम्मान देने की बजाए उनकी आवाज दबायी जा रही है. छात्रों की बातों को सुनना चाहिए.
प्रिंयका गांधी वाड्रा ने भी उठाया मुद्दा
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी नीट मुद्दे का विरोध कर कहा है कि हम छात्रों को साथ में है और उनकी आवाज को उठाते हैं. छात्रों के साथ जो हुआ है वह सही है या गलत ये आप बताए. हम जानते हैं कि यह मुद्दा असल मुद्दा है. छात्र सिर्फ अपना अधिकार ही मांग रहे हैं. बच्चे संघर्षों के साथ में पढ़ाई करते हैं और वह भविष्य देखते है. आप उनके भविष्य को बिगाड़ रहे हैं. वो सिर्फ यही कह रहे हैं कि आप उनसे बात कर लें. सिस्टम बदला जाएगा क्योंकि ये टूटा हुआ सिस्टम है. जो सड़कों पर हो रहा है वह अलोकतांत्रिक है न कि प्रदर्शन. सदन पर आप चर्चा नहीं करते और लोकतंत्र बचा नहीं है.
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