PM Kisan Update:उत्तराखंड में कृषि विभाग ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना में पारदर्शिता लाने के लिए ‘फार्मर रजिस्ट्री’ को अनिवार्य कर दिया है. इस नए नियम के चलते राज्य के लगभग 46 हजार किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि पंजीकरण न होने की दशा में उन्हें अगली किस्त का लाभ नहीं मिल पाएगा.
चल रहा ‘फार्मर रजिस्ट्री’ कार्यक्रम
हल्द्वानी में कृषि विभाग ने बताया कि नैनीताल जिले के 46 हजार किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है. पंजीकरण न कराने पर उन्हें पीएम किसान निधि, खाद-बीज सब्सिडी और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा. कृषि विभाग वर्तमान में किसानों के लिए फार्मर रजिस्ट्री कार्यक्रम चला रहा है. इसके तहत जिले में 7 हजार किसानों का रजिस्ट्रेशन कराया गया है. जबकि जिले में करीब 53 हजार किसान है. विभाग का कहना है कि बाकी 46 हजार किसानों ने अगर पंजीकरण नहीं कराया तो उन्हें पीएम किसान निधि जैसी कृषि विभाग की अन्य किसी योजना का लाभ नहीं मिलेगा.
जरूरी है ‘फार्मर रजिस्ट्री’
किसानों को अब सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना जरूरी है. एग्री स्टैक (डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर फार एग्रीकल्चर) के तहत कृषि विभाग में पंजीकृत किसानों की फार्मर रजिस्ट्री कराई जा रही है.
नैनीताल के इतने किसान वंचित
नैनीताल जिले में करीब 53 हजार किसानों का पटवारी व राज्सव परिषद ने भूमि का अंश निर्धारण कर रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी है. ऐसे में इन्हीं किसानों की फार्मर रजिस्ट्री कृषि विभाग को करानी है, लेकिन अभी करीब 46 हजार किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हुई है. विभागीय अधिकारियों के अनुसार किसानों को अपने फोन नंबर को आधार से जोड़ने में दिक्कत आ रही है.
ग्राम स्तर पर लगाए जा रहे कैंप
हालांकि इसके लिए ग्राम स्तर पर कैंप लगाकर किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा रही है. इसके साथ ही कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) में भी किसान फार्मर रजिस्ट्री का पंजीकरण करा सकते हैं. कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो किसान रजिस्ट्री नहीं कराएंगे, उन्हें भविष्य में पीएम किसान सम्मान निधि, खाद-बीज सब्सिडी, किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाएगा.
क्यों अनिवार्य हुई फार्मर रजिस्ट्री
केंद्र और राज्य सरकार का उद्देश्य कृषि योजनाओं का लाभ केवल पात्र और वास्तविक किसानों तक पहुंचाना है. डेटा के डिजिटलीकरण से फर्जीवाड़े और अपात्र लाभार्थियों की पहचान आसान होगी और सरकार के पास हर किसान की जमीन, फसल और बैंक विवरण का डेटा होगा. भविष्य में खाद, बीज और कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी भी इसी रजिस्ट्री के माध्यम से दी जाएगी. जिन किसानों ने अब तक अपनी रजिस्ट्री नहीं कराई है या जिनका डेटा आधार से मैच नहीं हो रहा है, उन्हें ₹2,000 की अगली किस्त नहीं मिलेगी.
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