AAP internal conflict: आम आदमी पार्टी के भीतर राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरियों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. पार्टी के पुराने चेहरों के अलग होने के इतिहास और हाल ही में चड्ढा की रहस्यमयी चुप्पी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ‘आप’ में आंतरिक लोकतंत्र और वफादारी के मुद्दे पर एक बार फिर बड़ी टूट होने वाली है.

AAP internal conflict: दिल्ली की राजनीति में इन दिनों आम आदमी पार्टी के अंदर चल रही खींचतान चर्चा का विषय बनी हुई है. पार्टी से जुड़े कई पुराने और भरोसेमंद चेहरे समय के साथ दूर होते गए हैं. अब इस सूची में राज्यसभा सांसद Raghav Chadha का नाम भी चर्चा में है. कहा जा रहा है कि उनका पार्टी से रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ एक नेता की दूरी नहीं है. बल्कि यह उस लंबे सिलसिले का हिस्सा है जिसमें कई बड़े नेता धीरे-धीरे पार्टी से अलग हो गए. इस पूरे मामले के केंद्र में पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal की कार्यशैली को भी जोड़ा जा रहा है.
राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर काफी तेज रहा है. साल 2012 में जब आम आदमी पार्टी की शुरुआत हुई थी तब वह एक युवा चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर पार्टी से जुड़े. उस समय उन्होंने लोकपाल बिल के मसौदे पर काम किया था. धीरे-धीरे वह पार्टी के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए. केजरीवाल के करीबी सहयोगियों में भी उनका नाम लिया जाने लगा. उनकी सगाई अभिनेत्री Parineeti Chopra के साथ पंजाब के मुख्यमंत्री आवास कपूरथला हाउस में हुई थी. उस कार्यक्रम में खुद अरविंद केजरीवाल मौजूद थे. उस समय इसे दोनों के बीच गहरे भरोसे का संकेत माना गया था.
लेकिन हाल के समय में परिस्थितियां बदलती हुई नजर आईं. जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे तब पार्टी को अपने नेताओं की आवाज की जरूरत थी. उसी समय राघव चड्ढा आंख की बीमारी का हवाला देकर इलाज के लिए लंदन चले गए. इस वजह से पार्टी के अंदर और बाहर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. बाद में जब वह वापस लौटे तब भी उनकी चुप्पी को लेकर सवाल उठते रहे. पार्टी के कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से भी उन पर टिप्पणी की. दिल्ली की नेता Atishi Marlena और नेता Saurabh Bharadwaj ने भी उनके रवैये पर सवाल उठाए.
यह पहली बार नहीं है जब आम आदमी पार्टी के भीतर ऐसे विवाद सामने आए हों. इससे पहले भी कई बड़े नेता पार्टी से अलग हो चुके हैं. पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल Yogendra Yadav और Prashant Bhushan को साल 2015 में पार्टी से बाहर कर दिया गया था. उस समय उन्होंने इस फैसले को आंतरिक लोकतंत्र के खिलाफ बताया था. इसके बाद कवि और नेता Kumar Vishwas भी धीरे-धीरे पार्टी से दूर हो गए. हाल के समय में Swati Maliwal का नाम भी पार्टी के अंदर चल रहे विवादों में सामने आया.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आम आदमी पार्टी में नेतृत्व और वफादारी का मुद्दा हमेशा अहम रहा है. पार्टी में काम करने वाले नेताओं से पूरी तरह समर्पण की उम्मीद की जाती है. अगर कोई नेता अलग राय रखता है या अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करता है, तो टकराव की स्थिति बन जाती है. यही कारण है कि समय-समय पर कई सक्षम नेता पार्टी से दूर होते गए. फिलहाल सबकी नजर राघव चड्ढा के अगले कदम पर टिकी हुई है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि उनका राजनीतिक सफर किस दिशा में आगे बढ़ता है.
