राम मंदिर चढ़ावा विवाद में चंपत राय से पूछताछ हुई, इस्तीफा लिया गया और अब SIT की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।

चंपत राय राम मंदिर के सर्वेसर्वा थे। दूध से लेकर माला तक उनके आदेश पर आता था। चंपत राय की नजर छोटे से लेकर बड़े तक हर एक ट्रांजेक्शन पर रहती थी। बिना इनके इजाजत के राम मंदिर में कुछ भी नहीं हो सकता था। और अब चंपत राय इससे पल्ला नहीं झाड़ सकते हैं। चंपत राय को SIT की टीम ने इस शर्त पर आरोपी नहीं बनाया, या मुकदमे वाली लिस्ट से दूर रखा कि वे खुद से ही सारे पदों से मुक्त हो जाएं और अपने इस्तीफे की घोषणा खुद ही कर दें। तो ये भी एक तरीके से चंपत राय का एक तरह से डिमोशन ही किया गया है। एक राम मंदिर जैसे बड़े संस्थान के सर्वेसर्वा होने के बाद आज चंपत राय कुछ भी नहीं हैं। SIT जांच में चंपत राय को इसलिए बचाया गया ताकि चंपत राय अपने सारे पदों से मुक्त हो जाएं। और अगर पदों से मुक्त होने में आनाकानी करते तो जांच का हिस्सा बनते, FIR में नाम होता। तो सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसा तो नहीं कि राम मंदिर के आंदोलन की भूमिका को देखते हुए, इनकी साख को बचाते हुए, इनकी इज्जत को भरे बाजार नीलाम ना करते हुए, इनको जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया? ताकि राम मंदिर के लिए आंदोलन करने वाला व्यक्ति बदनाम ना हो,
3 घंटे तक हुई पूछताछ, चंपत राय का इनकार
दरअसल चंदा चोरी के मामले में चंपत राय से राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से पुलिस ने करीब तीन घंटे तक लंबी पूछताछ की। इस पूछताछ के दौरान उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि मंदिर के दान मैनेजमेंट में उनकी कोई सीधी भूमिका नहीं थी। चंपत राय ने ये भी कहा कि मैं बेकसूर हूं।
पूछताछ और जांच से जुड़ी खास बातें
अयोध्या पुलिस और SIT की टीम ने उनसे दान की रसीद, गिनती, सुरक्षित अभिरक्षा और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से सवाल-जवाब किए, चंपत राय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें जैसे ही गड़बड़ी की भनक लगी, उन्होंने फौरन शिकायत कर कार्रवाई की। इस मामले में अब तक उनके करीबी सहयोगी टिन्नू यादव सहित 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस बड़े विवाद के सामने आने के बाद जांच को निष्पक्ष रखने के लिए चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अयोध्या बार एसोसिएशन ने ऐलान किया है कि आरोपियों का केस अयोध्या का कोई भी वकील नहीं लड़ेगा।
सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदारी किसकी?
चंपत राय की नजर हर ट्रांजेक्शन पर थी। दान पेटी खुलने से लेकर बैंक में पैसा जमा होने तक की पूरी चेन उनके कंट्रोल में थी, महासचिव होने के नाते पूरा राम मंदिर ट्रस्ट की जिम्मेदारी चंपत राय की थी, तो अगर चढ़ावे में चोरी हुई, सवाल ये भी है कि 5 जून को जब अविनाश शुक्ला के घर से कैश बरामद हुआ, तब 7 जून को ट्रस्ट ने क्यों कहा कि ऑडिट में कुछ गलत नहीं मिला? इसकी जानकारी सबसे पहले चंपत राय के पास थी तो उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की और अब चंपत राय ये कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं कि, उनकी सीधी भूमिका नहीं थी, लेकिन विरोधी पूछ रहे हैं कि अगर भूमिका नहीं थी, तो 3 घंटे की पूछताछ क्यों हुई? और इस्तीफा क्यों देना पड़ा?
अब स्थिति ये है कि चंपत राय ट्रस्ट में किसी पद पर नहीं हैं। उनके करीबी जेल में हैं। SIT की जांच चल रही है। उनकी पुरानी सेवा और राम मंदिर आंदोलन में भूमिका को देखते हुए उन्हें कानूनी कार्रवाई से दूर रखा गया। शर्त बस इतनी थी- खुद सम्मान के साथ हट जाओ। क्योंकि अगर FIR होती, गिरफ्तारी होती, तो राम मंदिर से जुड़ा सबसे बड़ा चेहरा कटघरे में होता। और इसका सियासी नुकसान बहुत बड़ा होता। तो क्या ये डील थी? क्या साख बचाने के लिए पद की कुर्बानी ली गई? इन सवालों के जवाब वक्त देगा। फिलहाल SIT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। तभी साफ होगा कि चंपत राय सिर्फ गवाह हैं, या गुनहगार ।
यह भी पढ़ें- बंगाल में UCC की तैयारी: शुभेंदु अधिकारी धामी मॉडल पर, 3 करोड़ मुसलमानों पर क्या होगा असर?
