पश्चिम बंगाल में UCC लागू करने की तैयारी तेज है। इससे विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार कानूनों में बड़े बदलाव हो सकते हैं, जबकि आदिवासी समुदायों को इससे छूट दिए जाने का प्रस्ताव है।

शुभेंदु अधिकारी अब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पदचिन्हों पर चल रहे हैं। अब उन्होंने उत्तराखंड को देखते हुए, बंगाल में भी UCC लागू करने का निर्णय ले लिया है। धामी सरकार ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू कर दिया, अब सीएम शुभेंदु भी उसी रास्ते पर चलने चलने जा रहे हैं। अब सवाल ये है कि, बंगाल में मुसलमानों की संख्या कितनी है? और UCC लागू हुआ तो क्या बदलाव आएगा? इसका मुसलमानों पर क्या असर पड़ेगा आइए डेटा के साथ समझते हैं द ट्रुथ 24 की इस खास रिपोर्ट में….
बंगाल में मुसलमानों की संख्या और रोहिंग्या का डेटा
2011 की जनगणना और मौजूदा अनुमान के मुताबिक बंगाल में मुसलमानों की संख्या 3 करोड़ के आस-पास है। ये बंगाल की कुल आबादी का लगभग 27% हिस्सा है और अगर दूसरे देश से आए हुए घुसपैठियों की बात करें तो, पूरे भारत में लगभग 40,000 से अधिक अवैध रोहिंग्या मुस्लिम रह रहे हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों जैसे कोलकाता के बाहरी इलाके और दक्षिण 24 परगना की अवैध बस्तियों में रह रहे हैं।
UCC अगर बंगाल में लागू हो जाएगा तो होगा क्या?
समान नागरिक संहिता यानी UCC का मतलब है एक देश, एक कानून, अभी भारत में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के मामले हर धर्म के लोग अपने-अपने नियमों, जैसे मुस्लिम पर्सनल लॉ या हिंदू लॉ, के हिसाब से तय करते हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में UCC लागू होने के बाद, चाहे कोई हिंदू हो या मुसलमान, सबके लिए एक ही कानून होगा।
इससे मुख्य रूप से ये 4 बड़े बदलाव आएंगे
शादियों को लेकर नए नियम
मुस्लिम पुरुषों को एक से अधिक, चार तक शादी करने का अधिकार खत्म हो जाएगा। अब हर कोई केवल एक ही शादी कर पाएगा।
लड़कियों की शादी के लिए कम से कम 18 साल और लड़कों के लिए 21 साल की उम्र होना जरूरी होगा। बचपन या कम उम्र में होने वाली शादियां गैर-कानूनी मानी जाएंगी।
हर शादी का सरकारी दफ्तर में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।
तलाक और महिलाओं के अधिकार
तीन तलाक या हलाला जैसी प्रथाएं पूरी तरह खत्म हो जाएंगी। तलाक केवल कोर्ट के जरिए ही हो सकेगा।
तलाक के बाद मुस्लिम महिलाओं को भी कोर्ट के जरिए पति से गुजारा भत्ता, रखरखाव का पैसा पाने का पूरा अधिकार मिलेगा।
जमीन-जायदाद और बच्चे
माता-पिता की संपत्ति या जमीन में जितना हक बेटे का होगा, उतना ही हक बेटी का भी होगा।
अब कोई भी व्यक्ति कानूनी रूप से बच्चा गोद ले सकेगा, जो कि पहले कुछ पर्सनल लॉ में आसान नहीं था।
बाहरी या धुसपैठियों पर क्या असर होगा?
UCC का सीधा नाता नागरिकता जांच से नहीं है, लेकिन इससे फर्जी कागजात बनाना मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि शादी, संपत्ति और बच्चों के जन्म का सारा रिकॉर्ड सरकारी कंप्यूटर में आधार कार्ड से जुड़ जाएगा। इससे बिना सही सरकारी दस्तावेजों के राज्य में रहना या जमीन खरीदना नामुमकिन हो जाएगा।
आदिवासियों पर इसका क्या असर होगा?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में साफ-साफ घोषणा की है कि पश्चिम बंगाल के मूल निवासी आदिवासी, कुड़मी और प्राचीन जनजातीय समुदाय इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे। इसका मतलब यह हुआ कि, परंपराएं सुरक्षित रहेंगी। आदिवासियों के शादी, तलाक, बच्चों और जमीन-जायदाद के अपने जो भी पुराने पारंपरिक या रूढ़िवादी नियम हैं, उनमें सरकार कोई दखल नहीं देगी, जैसे उत्तराखंड और असम में आदिवासियों को UCC से छूट दी गई है, ठीक वैसे ही बंगाल में भी आदिवासियों के रीति-रिवाज पहले जैसे ही चलते रहेंगे। वहीं मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक समानता के नाम पर सरकार इसे अगस्त तक कानूनी रूप देने में जुटी है।
राजनीति क्यों हो रही है?
अल्पसंख्यक यानी मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों का कहना है कि, यह कानून उनके धार्मिक रीति-रिवाजों में दखल देता है, जबकि शुभेंदु सरकार और बीजेपी का कहना है कि, इससे समाज में समानता आएगी और महिलाओं को सुरक्षा मिलेगी।
यह कानून कब से लागू होगा?
सबसे पहले 2 जुलाई को मंत्रियों की बैठक में इस कानून के ड्राफ्ट को मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद मानसून सत्र के दौरान अगस्त विधानसभा में इस बिल पर चर्चा होगी, बंगाल में बीजेपी कि पूर्ण बहुमत की सरकार है तो विपक्ष चाहे कितना भी विरोध कर ले, ये बिल विधानसभा में आसानी से पास हो जाएगा, विधानसभा से पास होने और राज्यपाल के दस्तखत के बाद अगले कुछ हफ्तों में इसके नियम तय करके इसे पूरे पश्चिम बंगाल में पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।
UCC का मतलब है सबके लिए शादी, तलाक, संपत्ति का एक जैसा कानून। बंगाल में 3 करोड़ मुसलमानों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। एक से ज्यादा शादी, तीन तलाक खत्म होगा। बेटियों को बराबर हक मिलेगा। आदिवासियों को छूट मिलेगी। और अवैध रूप से रह रहे लोगों के लिए फर्जी कागज से जमीन लेना मुश्किल हो जाएगा। अब देखना ये है कि अगस्त 2026 तक ये बिल पास होता है या सियासी लड़ाई में अटक जाता है।
यह भी पढ़ें- राम मंदिर दान चोरी मामले में संतों ने चंपत राय को घेरा! बोले- जिम्मेदारी से बच नहीं सकते, जवाब देना होगा
