Dehradun News: उत्तराखंड में चल रहे श्री बद्रीनाथ कॉरिडोर विकास कार्यों के बीच पारिस्थितिकी संतुलन को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है. उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी बद्रीनाथ कॉरिडोर विकास परियोजना को लेकर साइंटिस्ट और भू-गर्भ शास्त्रियों ने हाल ही में कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां और चेतावनी जारी की. साइंटिस्टों ने निर्माण कार्यों के दौरान आसपास के इकोसिस्टम पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन तैयार किया है, जिसे मुख्य सचिव आनंद बर्धन के समक्ष प्रस्तुत किया गया. हिमालय की संवेदनशीलता और जोशीमठ में आई आपदा के बाद, इस मास्टर प्लान के तहत हो रहे भारी निर्माण कामों को साइंटिफिक तरीके से आंका जा रहा है. आइए जानते हैं विस्तार से…
भारतीय रिमोट सेंसिंग संस्थान (आईआईआरएस) के वैज्ञानिकों ने गुरुवार को देहरादून में बद्रीनाथ कॉरिडोर विकास परियोजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य के दौरान पारिस्थितिक और पारिस्थितिकी तंत्र संतुलन बनाए रखने के संबंध में मुख्य सचिव आनंद बर्धन के सामने एक रिसर्च पेश की. इस अवसर पर मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में विकास गतिविधियों के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आवश्यक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भी ऐसे वैज्ञानिक आकलन की जरुरत होगी, उनका उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा और यह भी निर्देश दिया कि सर्वेक्षण के आधार पर इसका वेरिफिकेशन किया जाए.
वैज्ञानिकों ने क्या जताई चिंताएं
वैज्ञानिकों का मानना है कि बद्रीनाथ धाम में भारी मशीनों का उपयोग और गहरी खुदाई से पहाड़ की ढलान अस्थिर हो सकती है. कॉरिडोर के तहत बनने वाली बड़ी इमारतों और होटलों पर निरंतर निगरानी की सलाह दी. चूंकि बद्रीनाथ जाने वाला एकमात्र रास्ता जोशीमठ से होकर गुजरता है, जो पहले से ही धंस रहा है, इसलिए वैज्ञानिकों ने यहाँ “कैरीइंग कैपेसिटी” (वहन क्षमता) का आकलन करने पर जोर दिया है.
प्रदेश की समकालीन मुद्दों पर चर्चा
गुरुवार को केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्या सेनगुप्ता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की. पुष्करधामी ने गुरुवार को टिहरी गढ़वाल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के उन्नयन के भूमि पूजन के साथ-साथ कई विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम में भी शामिल हुए. सीएम धामी ने लोक भवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) से शिष्टाचार मुलाकात भी की. इस मीटिंग में दोनों नेताओं ने राज्य में विभिन्न विकास परियोजनाओं के साथ-साथ अन्य समकालीन मुद्दों पर चर्चा की.
सीएम धामी ने रखी 41.21 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की आधारशिला
समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार सीएम धामी ने टिहरी जिले के घंसाली में 41.21 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी, जिसमें 13.43 करोड़ रुपये की तीन उद्घाटन परियोजनाएं और 27.78 करोड़ रुपये की पांच नई परियोजनाएं शामिल हैं. समारोह के दौरान, मुख्यमंत्री ने पिलखी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक हेल्थ सेंटर को और एडवांस करने के लिए आधारशिला भी रखी. इसके अलावा उन्होंने अस्पताल के लिए भूमि दान करने के लिए कृष्णा गैरोला और उनके परिवार को सम्मानित किया.
सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं-शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा, जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी जा चुकी है, उनमें देरी नहीं होनी चाहिए और उनका समय पर पूरा होना और उद्घाटन सुनिश्चित किया जाएगा. राज्य सरकार पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दे रही है. दृढ़ संकल्प से संसाधनों की कमी को भी दूर किया जा सकता है.
बद्रीनाथ कॉरिडोर परियोजना के लाभ
बद्रीनाथ को एक ‘स्मार्ट आध्यात्मिक पहाड़ी शहर’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो पर्यावरणीय स्थिरता और आपदा प्रबंधन पर केंद्रित है. बद्रीनाथ कॉरिडोर परियोजना का मुख्य उद्देश्य तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा को सुरक्षित, सुगम और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाना है. इस कॉरिडोर के बनने के बाद यात्रा बहुत ही आसान हो जाएगी. यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नए विश्राम गृह, सुविधाओं से युक्त शौचालय,वाहनों के लिए पार्किंग और बेहतर कनेक्टिविटी (जैसे – हेमकुंड रोपवे) की सुविधा मिलेगी. इस परियोजना के तहत अलकनंदा रिवरफ्रंट का सौंदर्यीकरण किया जाएगा. इसके निर्माण के बाद स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पर्यटन से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. सीमावर्ती क्षेत्रों (माना गांव) तक बेहतर कनेक्टिविटी से सामरिक मजबूती मिलेगी.
