Wangchuk hunger strike: नीट-यूजी परीक्षा धांधली और पेपर लीक विवाद को लेकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े सोनम वांगचुक का दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन 18वें दिन भी जारी है.

Wangchuk hunger strike: राजनीति और सार्वजनिक जीवन में रिश्ते कितनी तेजी से करवट लेते हैं, इसका एक बड़ा उदाहरण इन दिनों देखने को मिल रहा है. हम बात कर रहे हैं देश के शिक्षा मंत्री और लद्दाख के जाने-माने पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के बीच के रिश्तों की. मार्च 2023 में जहां ये दोनों देश के शिक्षा सुधारों पर एक सुर में बात कर रहे थे, वहीं साल 2026 में इनके बीच का यह जुड़ाव एक बड़े टकराव में बदल चुका है. नीट परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के मुद्दे पर देश के शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहे सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे हैं.
जब दोनों के बीच दिखी थी गहरी दोस्ती
समय का पहिया कितनी जल्दी घूमता है, यह करीब तीन साल पुरानी एक मुलाकात से समझा जा सकता है. मार्च 2023 में शिक्षा मंत्री ने सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी से बहुत ही गर्मजोशी से मुलाकात की थी. इस बैठक के बाद मंत्री जी ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीरें भी साझा की थीं. उन्होंने वांगचुक के विचारों और शिक्षा के क्षेत्र में उनके समर्पण की जमकर तारीफ की थी. उस समय सोनम वांगचुक ने भी शिक्षा नीति को लेकर मंत्री जी की सोच को काफी सराहा था और दोनों देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए साथ काम करते दिखे थे.
क्यों आया दोनों के रिश्तों में यू-टर्न
सहयोग से शुरू हुआ यह सफर साल 2026 में आते-आते बड़े संघर्ष में तब्दील हो गया. इसकी मुख्य वजह बनी साल 2026 में आयोजित नीट-यूजी परीक्षा और सीबीएसई के ऑनलाइन मूल्यांकन से जुड़ा विवाद. इस परीक्षा में बड़े पैमाने पर पेपर लीक होने के गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी और दोबारा टेस्ट कराया गया. इस पूरे विवाद की वजह से शिक्षा मंत्रालय और खुद शिक्षा मंत्री की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे. इसी बीच सोशल मीडिया पर भी सरकार के खिलाफ एक बड़ा अभियान छिड़ गया.
अनशन के 18वें दिन भी जिद पर अड़े
नीट परीक्षा के इसी विवाद से नाराज होकर सोनम वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर का रुख किया. उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी. बुधवार को उनकी इस हड़ताल का 18वां दिन है और दिन पर दिन उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा है. कई बड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों ने उनसे अनशन खत्म करने की अपील भी की है. इसके बावजूद वांगचुक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और अपनी मांग पर डटे हुए हैं.
सिर्फ एक इस्तीफे से नहीं बदलेगा देश
अपनी बिगड़ती सेहत के बीच भी सोनम वांगचुक ने प्रदर्शन कर रहे लोगों का हौसला बढ़ाया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनका मकसद केवल किसी एक मंत्री की कुर्सी छीनना या उनका इस्तीफा लेना नहीं है. वह चाहते हैं कि देश के युवा और आम लोग अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हों. उन्होंने कहा कि शायद इस भूख हड़ताल से तुरंत कोई इस्तीफा न हो, लेकिन जिस दिन देश की जनता पूरी तरह जाग जाएगी, उस दिन सरकार के हर विभाग में अपने आप सुधार दिखने लगेगा.
