पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट को छोड़ने का ऐलान कर दिया है. जिसके बाद लोगों के मन में सवाल आ रहे हैं कि उन्होंने आखिर नंदीग्राम सीट को ही क्यों छोड़ा? पढ़ें पूरी रिपोर्ट-

शुभेंदु अधिकारी ने छोड़ी नंदीग्राम सीट
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि वे नंदीग्राम सीट को छोड़ेंगे और भवानीपुर से विधायक बने रहेंगे. इस फैसले के बाद कई लोग चौंक रहे हैं. आपको बता दें कि नंदीग्राम सिर्फ एक सीट नहीं बल्कि शुभेंदु अधिकारी के पूरे राजनितिक करियर की पहचान भी रही है. इसी सीट से अधिकारी बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा बने हैं.
क्या कोई बड़ा संदेश?
आपको बता दें कि नंदीग्राम सीट से ही शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी चुनाव हराया था. जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं. अब अधिकारी के ऐलान के बाद सवाल उठ रहा है कि उन्होंने आखिर नंदीग्राम सीट को ही क्यों छोड़ा है? इसके पीछे सिर्फ राजनीतिक रणनीति है या फिर कोई बड़ा संदेश भी छिपा हुआ है, जो लोगों को अभी नजर नहीं आ रहा है.
ममता को हराकर बटोरी सुर्खियां
साल 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सबसे ज्यादा चर्चित सीट बन गई थी. इस सीट पर एक तरफ ममता बनर्जी थीं तो दूसरी तरफ उनके पुराने सहयोगी शुभेंदु अधिकारी थे. इस दौरान चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराकर काफी सुर्खियां बटोरी थीं. जिसके बाद शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के लिए बंगाल में बड़ा चेहरा बन गए. जिसके बाद आज वे मुख्यमंत्री पद पर बैठे हैं.
क्यों छोड़ी नंदीग्राम सीट?
आपको बता दें कि भवानीपुर को कोलकाता का हाई-प्रोफाइल शहरी इलाका माना जाता है और यह लंबे समय तक ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ रही है. जब इस सीट से शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव जीता, तो यह सिर्फ जीत नहीं बल्कि सत्ता परिवर्तन का प्रतीक भी माना गया. राजनीति विशेषज्ञों की मानें तो राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी ऐसी सीट रखना चाहते थे, जो सीधे तौर पर राज्य की राजधानी और प्रशासनिक केंद्रों के साथ जुड़ी हुई हो.
शहरी राजनीति का केंद्र है भवानीपुर
भवानीपुर सीट को सत्ता, प्रशासन और शहरी राजनीति का केंद्र माना जाता है. मुख्यमंत्री बनने के बाद नेता के लिए राजधानी क्षेत्र के जुड़ाव होना काफी अहम भूमिका माना जाता है और भवानीपुर सीट कोलकाता के केंद्र में मौजूद है और यहां से राज्य प्रशासन के ऊपर पकड़ रखना काफी आसान माना जाता है. शुभेंदु अधिकारी अब खुद को पूरे बंगाल के प्रशासक के रूप में स्थापित करना चाहते हैं और भवानीपुर सीट इस छवि को काफी मजबूत करती है.
यह भी पढ़ें- नंदीग्राम सीट छोड़ेंगे शुभेंदु अधिकारी! भवानीपुर से रहेंगे विधायक; नए CM का बड़ा ऐलान
