TMC Delimitation Demand: टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर मानसून सत्र से पहले परिसीमन और एफसीआरए संशोधन विधेयक जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने और आम सहमति बनाने की मांग की है.

TMC Delimitation Demand: संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले देश की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी है. इस पत्र में उन्होंने देश के दो सबसे बड़े और संवेदनशील मुद्दों पर तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है. ये दो मुद्दे हैं लोकसभा सीटों का नए सिरे से निर्धारण यानी परिसीमन (Delimitation) और विदेशी चंदे से जुड़ा एफसीआरए (FCRA) संशोधन बिल. टीएमसी सांसद ने साफ कहा है कि इतने बड़े और गंभीर कानूनों को बिना विपक्ष की सलाह के संसद में पेश करना बिल्कुल ठीक नहीं होगा.
कश्मीर पुनर्गठन बिल का हवाला देकर सरकार के पुराने रिकॉर्ड पर उठाए सवाल
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, डेरेक ओ’ब्रायन ने सरकार की नीयत पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि हालांकि इस मॉनसून सत्र के सरकारी एजेंडे में परिसीमन से जुड़ा कोई बिल आधिकारिक तौर पर शामिल नहीं है. इसके बावजूद विपक्ष को डर है कि सरकार अचानक कोई बड़ा कदम उठा सकती है. उन्होंने याद दिलाया कि साल 2019 में भी जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक को अचानक राज्यसभा में लाकर हर किसी को चौंका दिया गया था. टीएमसी नेता ने प्रधानमंत्री को इसी साल अप्रैल में दो तिहाई बहुमत न मिलने के कारण खारिज हुए संविधान संशोधन विधेयकों की भी याद दिलाई.
एफसीआरए बिल से गरीब बच्चों और ईसाई संस्थानों को नुकसान का दावा
डेरेक ओ’ब्रायन ने अपनी चिट्ठी में नए एफसीआरए (FCRA) संशोधन बिल 2026 पर भी बहुत कड़े सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि अगर यह नया कानून पास हो जाता है, तो इसका सबसे बुरा असर देश के गरीब, पिछड़े और वंचित समाज के लिए काम करने वाले सामाजिक संगठनों पर पड़ेगा. उन्होंने दावा किया कि इस सख्त कानून की वजह से ईसाई समुदाय द्वारा चलाए जा रहे हजारों स्कूल, कॉलेज और अंतरराष्ट्रीय चैरिटेबल संस्थाओं के कामकाज में सरकार का दखल बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा. उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 19 और 26 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का हनन बताया.
कृषि कानूनों जैसी जल्दबाजी न दोहराने की सख्त नसीहत
टीएमसी सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह दी है कि सरकार को पुराने तीन कृषि कानूनों की तरह इस बार जल्दबाजी में कोई भी नया बिल पास कराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. उन्होंने मांग की है कि कोई भी कदम उठाने से पहले देश के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को भरोसे में लिया जाए. हालांकि, केंद्र सरकार इस मुद्दे पर पहले ही अपना रुख साफ कर चुकी है. सरकार का कहना है कि साल 2026 के बाद होने वाली देश की पहली नई जनगणना से पहले परिसीमन की प्रक्रिया शुरू ही नहीं की जा सकती. सरकार के मुताबिक एफसीआरए में बदलाव का मकसद सिर्फ विदेशी पैसे के इस्तेमाल में पारदर्शिता लाना है.
संसदीय कमेटी को बिल भेजने की मांग और बीएसी बैठक में विरोध का एलान
तृणमूल कांग्रेस ने अब इस मुद्दे पर आर पार की लड़ाई का मन बना लिया है. पार्टी ने मांग की है कि एफसीआरए संशोधन बिल को तुरंत संसद की एक विशेष स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए. वहां इस कानून के हर एक पहलू पर बारीकी से जांच और विस्तार से चर्चा होनी चाहिए. टीएमसी ने यह भी साफ कर दिया है कि वे संसद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) में इस बिल पर चर्चा के लिए समय तय करने का पुरजोर विरोध करेंगे. उनका मानना है कि बिना पूरी जांच पड़ताल और विपक्ष की सहमति के इस बिल को संसद से पास कराने की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए.
