सुप्रीम कोर्ट की केंद्र सरकार से गुरुवार को उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से बनाए गए यूजीसी के इक्विटी नियमों पर फिर से विचार करने को लेकर बातचीत हुई है.
केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने बताया कि यूजीसी के इक्विटी रेगुलेशंस, 2026 पर दोबारा से विचार किया जा रहा है. CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हम इस पर पुनर्विचार कर रहे हैं, लेकिन यह किस दिशा में जाएगा, यह नहीं कहा जा सकता है. जानकारी के मुताबिक अब सुप्रीम कोर्ट ने UGC को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है. कोर्ट ने यूजीसी को सभी याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर एक व्यापक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने दी थी चेतावनी
आपको बता दें कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस, 2026 को सुप्रीम कोर्ट पहले ही अंतरिम तौर पर रोक चुका है. याचिकाओं में जातिगत भेदभाव की परिभाषा और नियमों के संभावित दुरुपयोग पर सवाल उठाए गए हैं. उस दौरान कोर्ट ने कहा था कि प्रावधान प्रथम दृष्टया अस्पष्ट हैं और इनके बहुत व्यापक परिणाम हो सकते हैं. वही इसके साथ ही कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी थी कि ये समाज को विभाजित कर सकते हैं और खतरनाक प्रभाव भी डाल सकते हैं.
केंद्र सरकार और UGC से मांगा था जवाब
जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी से नए ढांचे को चुनौती देने वाली तीन याचिकाओं पर जवाब देने को भी कहा था. अदालत ने कहा था, संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हम यह निर्देश देते हैं कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम, 2012 अगले आदेश तक लागू रहेंगे
कोर्ट ने प्रावधानों पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने नियमों की जांच करते हुए कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए. एक चिंता नियम 3(1)(सी) से संबंधित थी, जिसमें जाति-आधारित भेदभाव को अलग से परिभाषित किया गया है. इस दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब नियम 3(1)(ई) में पहले से ही भेदभाव की व्यापक परिभाषा मौजूद है, तो एक अलग परिभाषा की क्या जरूरत है. कोर्ट ने नियमों से रैगिंग को बाहर रखे जाने पर भी सवाल उठाया. अदालत ने कहा कि एक ही जाति के आर्थिक रूप से संपन्न छात्रों द्वारा उसी जाति के अन्य छात्रों को परेशान करने के मामले हो सकते हैं और कोर्ट ने यह जानना चाहा कि विनियम इस तरह के मामलों से कैसे निपटते हैं.
