19 अगस्त 2026 को उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर बहुत बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। उत्तराखंड के नैनीताल हाईकोर्ट ने अंकिता की हत्या के तीनों दोषियों, पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता की जमानत याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने दो दिनों की लंबी बहस के बाद यह स्पष्ट कर दिया कि दोषियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा और उन्हें कोई राहत नहीं मिलेगी। यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि 30 मई 2025 को कोटद्वार की जिला एवं सत्र अदालत ने इन तीनों को अंकिता की हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आखिर क्या थी अंकिता भंडारी केस की पूरी कहानी? क्यों 19 साल की बेटी की न्याय यात्रा ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया? और धामी सरकार की मजबूत पैरवी का इस फैसले पर क्या असर रहा? आइए समझते हैं द ट्रुथ 24 की इस खास वीडियो में!
क्या थी अंकिता भंडारी केस की पूरी कहानी?
पौड़ी गढ़वाल के डोभ-श्रीकोट गांव की रहने वाली अंकिता भंडारी महज 19 साल की थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, इसलिए अंकिता ने होटल मैनेजमेंट का छोटा सा कोर्स किया और अपने पैरों पर खड़े होने का सपना देखा। कोर्स पूरा करने के बाद उसे नौकरी भी मिग गई। 28 अगस्त 2022 को अंकिता ने यमकेश्वर इलाके में स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम शुरू किया। इस रिजॉर्ट का मालिक था पुलकित आर्य, जो पूर्व बीजेपी नेता का बेटा था। नौकरी शुरू करने के कुछ ही दिनों बाद पुलकित और उसके सहयोगियों ने अंकिता पर रिजॉर्ट के मेहमानों को ‘विशेष सेवाएं’ देने का दबाव बनाना शुरू किया। लेकिन स्वाभिमानी अंकिता ने इससे साफ इनकार कर दिया।
फिर आई 18 सितंबर की वो भयानक रात, अंकिता ने अपने दोस्त को फोन पर बताया था कि, वह वहां से निकलना चाहती है। लेकिन 18 सितंबर 2022 की रात अंकिता रहस्यमय तरीके से गायब हो गई।
चीला बैराज से मिला शव
24 सितंबर को अंकिता का शव चीला बैराज नहर से बरामद हुआ। पोस्टमॉर्टम में डूबने से मौत और शरीर पर चोट के निशान मिले। पुलिस जांच में साफ हुआ कि, अनैतिक काम से इनकार करने पर पुलकित, सौरभ और अंकित ने अंकिता को धक्का देकर नहर में फेंक दिया था।
धामी सरकार ने लिया कड़ा एक्शन
घटना के सामने आते ही पूरे उत्तराखंड में भारी जनाक्रोश फैल गया। लोग सड़कों पर उतर आए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत कड़े कदम उठाए। 24 घंटे में आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया गया और एक महिला आईपीएस अधिकारी की अगुवाई में SIT का गठन किया गया। एसआईटी ने 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की और 47 गवाहों को कोर्ट में मजबूती से पेश किया। परिवार की मांग पर तीन बार सरकारी वकील बदले गए। पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई और पिता व भाई को सरकारी नौकरी सौंपी गई। इतना ही नहीं, गैर-कानूनी रिजॉर्ट पर बुलडोजर एक्शन भी हुआ। जब माता-पिता ने वीआईपी एंगल और जांच को लेकर सीबीआई की मांग की, तो मुख्यमंत्री धामी ने जनवरी 2026 में जनभावनाओं और परिवार के सम्मान में केस सीबीआई को सौंपने की सिफारिश कर दी। अदालत में 30 मई 2025 को तीनों दोषियों को उम्रकैद मिली और अब हाईकोर्ट में भी सरकार की तरफ से इतनी ठोस कानूनी पैरवी हुई कि, कोर्ट ने दोषियों की दलीलों को खारिज करते हुए जमानत अर्जी रद्द कर दी।
हाईकोर्ट का फैसले के बाद आया CMO का बयान!
दो दिन की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने कई तर्क दिए कि यह हादसा था या खुदकुशी, लेकिन हाईकोर्ट ने निचली अदालत के साक्ष्यों और एसआईटी की जांच को मजबूत माना।
फैसले के तुरंत बाद मुख्यमंत्री कार्यालय यानी कि, CMO ने बयान जारी करते हुए कहा कि, “राज्य सरकार की शुरुआत से ही इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति रही है। हमारी मजबूत कानूनी पैरवी के कारण ही दोषियों को कोई राहत नहीं मिल सकी। कानून के सामने कोई भी प्रभावशाली व्यक्ति बड़ा नहीं है।” सीएमओ ने यह भी स्पष्ट किया कि, इस संवेदनशील मुद्दे पर बाहर बैठकर राजनीति करने और बिना सबूत आरोप लगाने के बजाय सभी को न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए। अंकिता भंडारी की कहानी केवल एक आपराधिक घटना नहीं है। यह पहाड़ की एक ऐसी बेटी की दुखद कहानी है, जिसने गरीबी से निकलकर ईमानदारी से जीने का रास्ता चुना और गलत काम के आगे झुकने से इनकार कर दिया। हालांकि दोषियों की अपील अभी उच्च अदालत में लंबित है और अंतिम कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी, लेकिन हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किया जाना यह साफ संदेश देता है कि जब जांच में दम हो और सरकार की पैरवी निष्पक्ष हो, तो कोई भी अपराधी कानून के शिकंजे से बच नहीं सकता।
