Ujh Multipurpose Project: भारत के हिस्से वाले रावी नदी के पानी का पूरा इस्तेमाल करने के लिए केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में दशकों से अटकी बहुउद्देशीय उझ परियोजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है.

Ujh Multipurpose Project: सिंधु जल समझौते पर भारत के कड़े रुख के बाद अब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर की पुरानी उझ बहुउद्देशीय परियोजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है. केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को इस बेहद अहम प्रोजेक्ट के कामकाज की समीक्षा की. उन्होंने साफ कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के हित से जुड़ी पुरानी फाइलों को फिर से खोला जा रहा है. दशकों से लटकी इन परियोजनाओं में हुई देरी की वजह से भारत के हिस्से का बहुत सारा पानी बिना इस्तेमाल हुए सीमा पार बह जाता था. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा और भारत अपने हक के पानी की एक-एक बूंद का पूरा इस्तेमाल करेगा.
100 साल पुराना सपना, अब धरातल पर उतरने की तैयारी
उझ परियोजना कोई नई योजना नहीं है, बल्कि इसकी परिकल्पना लगभग 100 साल पहले की गई थी. हालांकि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और कानूनी उलझनों की वजह से यह दशकों तक लटकी रही. ठीक इसी तरह पंजाब की शाहपुरकंडी परियोजना भी करीब 40 सालों तक फाइलों में दबी रही. डॉ. जितेंद्र सिंह ने जल शक्ति मंत्रालय की सरकारी कंपनी WAPCOS के अफसरों के साथ बैठक कर काम को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि इन दोनों परियोजनाओं को बिना किसी और देरी के जल्द से जल्द पूरा किया जाए.
जमीन मिलते ही शुरू होगा निर्माण का काम
अक्सर बड़ी परियोजनाओं में पूरी जमीन मिलने के इंतजार में काफी वक्त बर्बाद हो जाता है. लेकिन इस बार सरकार ने काम करने की रणनीति बदल दी है. अफसरों ने बैठक में बताया कि अब पूरी जमीन मिलने का इंतजार नहीं किया जाएगा. जिस हिस्से की जमीन मिलती जाएगी, वहाँ तुरंत निर्माण कार्य चालू कर दिया जाएगा. इसके साथ-साथ बाकी बची जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया भी चलती रहेगी. इस नए तरीके से काम करने में काफी समय बचेगा और परियोजना तय वक्त से पहले पूरी हो सकेगी.
गुणवत्ता और सुरक्षा से नहीं होगा कोई समझौता
केंद्रीय मंत्री ने प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी सरकारी एजेंसियों को सख्त हिदायत दी है कि काम में तेजी के चक्कर में क्वालिटी से कोई समझौता नहीं होना चाहिए. निर्माण कार्य में नई से नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि बांध सुरक्षित और मजबूत बने. सरकार का मानना है कि निर्माण की गुणवत्ता जितनी अच्छी होगी, आने वाले दशकों तक स्थानीय लोगों को उतना ही ज्यादा फायदा मिलेगा. इसलिए अधिकारियों को सुरक्षा मानकों का खास ख्याल रखने के आदेश दिए गए हैं.
रावी नदी के पानी पर भारत का होगा पूरा अधिकार
उझ और शाहपुरकंडी जैसी परियोजनाओं का असली मकसद रावी और उसकी सहायक नदियों के पानी का भारत में ही सही इस्तेमाल करना है. इन बांधों के बनने से जम्मू-कश्मीर और पंजाब के बड़े इलाके को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलेगा. इसके अलावा आसपास के गाँवों को पीने का साफ पानी मिलेगा और बिजली का उत्पादन भी बढ़ेगा. सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचा मजबूत होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा सहारा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
2026 में उझ प्रोजेक्ट को मिली नई रफ्तार
शाहपुरकंडी प्रोजेक्ट पर 2019 में दोबारा काम शुरू किया गया था और अब यह लगभग बनकर तैयार होने वाला है. इसी कड़ी में 2026 में उझ परियोजना को भी नए सिरे से रफ्तार दी गई है. सरकार का यह कदम पड़ोसी देश को सीधा और साफ संदेश देता है कि भारत अब अपने जल संसाधनों का एक कतरा भी बेकार नहीं जाने देगा. देश के प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग कर जनता तक उसका सीधा फायदा पहुँचाना ही मोदी सरकार की प्राथमिकता है.
