उत्तराखंड वासियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. दरअसल, अभी के समय जो लोगों को बिजली की तारें बाहर दिखाई देती है. अब सरकार उसे धीरे-धीरे गायब करने वाली है. बिजली के तार जो खंभों और गलियों में जाल बने हुए दिखाई देते हैं. उन्हें अब जमीन के नीचे डालने की तैयारी की जा रही है.
बता दें कि केंद्र सरकार ने ऋषिकेष में बिजली के तारों को भूमिगत करने के 489 करोड़ रुपये के फैसले को मंजूरी दे दी है. साथ ही लोगों के लिए एक और अच्छी खबर सामने आ रही है, दरअसल, हरिद्वार, देहरादून और ऋषिकेश के तीनों शहरों में SCADA यानी की स्मार्ट निगरानी प्रणाली के लिए 59 करोड़ रुपये दिए है. शहरी कार्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय विद्युत एवं आवासन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर इसकी स्वीकृति दी है. मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए आभार जताया है.
SCADA क्या है?
बता दें कि SCADA के लिए अलग से 59 करोड़ दिए गए है. कई लोगों को लेकिन इसका मतलब पता नहीं होता है. सीधे शब्दों में कहा जाए तो यह एक तकनीक होती है, जिसमें बिजली वितरण की व्यवस्था को कंट्रोल रूम से ही संभाला जाता है. फॉल्ट से लेकर खराबी सभी चीजें वहां से आसानी से पता की जा सकती है.
क्यों किया जा रहा यह काम
दरअसल, ऋषिकेश भारत और दूसरे देश से आए लोगों के लिए पर्यटन का केंद्र माना जाता है. हर साल इस शहर में लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं. इस दौरान इन बिजली के खंभों पर तारों का जाल काफी बुरा लगने के साथ-साथ बारिश और आंधी में हादसों के लिए खतरा बनता है.
मुख्यमंत्री धामी ने कहा- आगे के लिए भी यह जरूरी
मुख्यमंत्री धामी ने तारों के भूमिगत करने को केवल आज ही नहीं बल्कि आने वाले समय के लिए काफी जरूरी माना है. कुंभ मेले के समय के लिए भी यह व्यवस्था काफी जरूरी है. कुंभ मेले के दौरान में श्रदालुओं की भीड़ बहुत ज्यादा होती है. इस समय में बिजली से संबंधित परेशानियां होती है. अब लेकिन स्मार्ट मॉनिटरिंग और भूमिगत केबलिंग से बिजली गुल होने वाली समस्या कम हो जाएगी. साथ ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जल्द से जल्द परियोजना पर काम करने के लिए निर्देश जारी किया है.
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