मुजफ्फरनगर: मुजफ्फरनगर की सड़कों पर उस समय लोगों की नजरें ठहर गईं, जब सैकड़ों स्कूली बच्चे माथे पर काली पट्टी और हाथों में काले झंडे लेकर सड़कों पर उतरे. बच्चों को मोबाइल की लत से बचाने के लिए एक अनोखी मुहिम थी. बच्चो के हाथों में, मां मुझे मोबाइल से बचा लो, छोटे हाथों में किताबें अच्छी लगती हैं, मोबाइल नहीं और मोबाइल स्क्रीन नहीं, सपनों को छूना है जैसे स्लोगन लिखी तख्तियां थीं, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही थीं.
सैकड़ों बच्चों ने निकाली रैली
यह जागरूकता रैली श्री गिरधारी लाल जैन मेमोरियल पब्लिक स्कूल द्वारा निकाली गई. जिसमें मोबाइल देखने वाले बच्चों को होने वाले नुकसान से जागरूक करने की कोशिश की गई थी. इस दौरान अतिथियों द्वारा जहां मोबाइल की डमी गब्बरो में बांधकर आसमान में उड़कर मासूम बच्चों को मोबाइल से अलग रहने का संदेश दिया गया है तो वहीं रैली के दौरान इन मासूम बच्चों ने भी माथे पर काली पट्टी और हाथों में काले झंडों के साथ स्लोगन लिखी तख्तियां ले रखी थी. जिससे कि मोबाइल देखने वाले बच्चों को जागरूक किया जा सके.
इस दौरान स्कूल की प्रिंसिपल अलका जैन का कहना था कि हमने मोबाइल फोन के यूज़ बच्चों द्वारा यूज़ करने के संबंध में जागरूकता रैली निकाली क्योंकि मोबाइल फोन आज किसी की भी व्यक्तिगत समस्या ना होकर जन जागरूकता का विषय हो गया है. घरों में छोटे-छोटे बच्चों को 2 साल के बच्चों को मोबाइल फोन दे दिए जाते हैं. एक खिलौने की तरह वह लोग मोबाइल फोन इस्तेमाल कर लेते हैं और वह अनजाने में इस लत का शिकार हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि मैं यही संदेश देना चाहती हूं कि किसी भी चीज को सुधारने के लिए कुछ त्याग करना पड़ता है.
बच्चों ने खुद दिया संदेश
रैली में शामिल छात्र अंशुमन सैनी ने कहा कि आजकल बच्चे बहुत ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे आंखें कमजोर हो रही हैं, चश्मा लग रहा है और माइग्रेन जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं. कहा कि मोबाइल के कारण बच्चे चिड़चिड़े हो रहे हैं और उनकी एकाग्रता भी कम हो रही है. इसलिए बच्चों को खुद भी मोबाइल छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए.
इस जागरूकता अभियान के माध्यम से स्कूल ने यह संदेश दिया कि बच्चों का यह समय उनके भविष्य और करियर निर्माण का है. अगर अभी से उन्हें मोबाइल की लत लग गई, तो इसका असर उनके व्यक्तित्व और जीवन पर पड़ सकता है. मासूम बच्चों की इस अनोखी पहल ने समाज और अभिभावकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि तकनीक का सही उपयोग जरूरी है, लेकिन बचपन को स्क्रीन में कैद होने से बचाना उससे भी ज्यादा जरूरी है.
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