up government stops salary of 47000 employees: उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति का विवरण न देने वाले 47,000 कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है, जबकि अन्य सभी को 28 फरवरी को ही सैलरी मिल जाएगी. भ्रष्टाचार रोकने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम के तहत अब पोर्टल पर जानकारी अपडेट करने के बाद ही रुका हुआ वेतन जारी होगा.

up government stops salary of 47000 employees: उत्तर प्रदेश में इस बार होली से पहले सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रदेश के सभी नियमित कर्मचारियों और पेंशन पाने वालों का वेतन और पेंशन अट्ठाईस फरवरी को जारी किया जाएगा. इसके लिए वित्त विभाग की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है. लेकिन इसी आदेश के साथ एक और सख्त निर्णय भी लिया गया है. प्रदेश के करीब सैंतालीस हजार ऐसे कर्मचारी हैं, जिनकी होली इस बार फीकी रहने वाली है. इन कर्मचारियों को त्योहार से पहले वेतन नहीं मिलेगा. कारण यह है कि इन्होंने अब तक अपनी संपत्ति का विवरण सरकार को नहीं दिया है. सरकार ने पहले ही साफ कर दिया था कि बिना विवरण जमा किए वेतन रोका जा सकता है. अब उसी नियम के तहत कार्रवाई की गई है.
सरकार ने पहले सभी राज्य कर्मचारियों को अपनी चल और अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा जमा करने के निर्देश दिए थे. इसके लिए अंतिम तारीख दस मार्च तय की गई है. जिन कर्मचारियों ने समय रहते यह जानकारी दे दी है, उन्हें वेतन और पेंशन मिल जाएगी. लेकिन जिन कर्मचारियों ने अब तक संपत्ति का विवरण जमा नहीं किया है, उन्हें जनवरी और फरवरी महीने का वेतन भी तभी मिलेगा, जब वे अपनी जानकारी अपडेट करेंगे. हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है कि केवल विवरण देने से पदोन्नति या एसीपी का लाभ तुरंत नहीं मिलेगा. इसके लिए अलग प्रक्रिया लागू रहेगी. सरकार का कहना है कि यह कदम कर्मचारियों में पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी है.
इस पूरे मामले में मुख्य सचिव एस पी गोयल ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने राज्य कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपनी संपत्ति का ब्योरा अनिवार्य रूप से जमा करें. यह आदेश उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जारी किया गया है. सभी कर्मचारियों को अपनी संपत्ति की जानकारी मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करनी थी. लेकिन समय सीमा बीत जाने के बाद भी हजारों कर्मचारियों ने आदेश का पालन नहीं किया. सरकार ने इसे गंभीर लापरवाही माना है. इसी वजह से वेतन रोकने का निर्णय लिया गया है.
सरकारी अधिकारियों के अनुसार कई बार कर्मचारियों को सूचना दी गई थी. इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने अपनी जानकारी दर्ज नहीं कराई. शासन का मानना है कि यह केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि जवाबदेही तय करने का जरिया है. इसी आधार पर मुख्य सचिव की ओर से शासनादेश भी जारी कर दिया गया है. अब जब तक संबंधित कर्मचारी अपनी चल और अचल संपत्ति का पूरा विवरण नहीं देंगे, तब तक उनका रुका हुआ वेतन जारी नहीं किया जाएगा. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस फैसले में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी. सभी कर्मचारियों पर यह नियम समान रूप से लागू होगा.
सरकार और विभागीय अधिकारियों ने प्रभावित कर्मचारियों से अपील की है कि वे तुरंत मानव संपदा पोर्टल पर जाकर अपनी संपत्ति का विवरण भरें और अपडेट करें. ऐसा करते ही उनका लंबित वेतन जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. अधिकारियों ने यह भी बताया है कि जिन कर्मचारियों ने पहले ही अपना विवरण जमा कर दिया है, उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. सैंतालीस हजार कर्मचारियों को छोड़कर प्रदेश के बाकी सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशन पाने वालों का वेतन और पेंशन अट्ठाईस फरवरी को ही जारी कर दी जाएगी. सरकार ने साफ कर दिया है कि नियमों का पालन करने वालों को कोई नुकसान नहीं होगा. लेकिन लापरवाही करने वालों को अब परिणाम भुगतने होंगे.
