Chardham Yatra 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी को चारधाम यात्रा का न्योता मिला है. ये न्योता श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने लखनऊ आकर दिया.
Char Dham Yatra 2026: चारधाम यात्रा की तैयारियों के बीच बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार मुलाकात की. उन्होंने उन्हें इस वर्ष की चारधाम यात्रा में आने का निमंत्रण दिया।
क्या हुई चर्चा?
इस मौके पर बीकेटीसी अध्यक्ष ने न सिर्फ उन्हें चारधाम यात्रा का निमंत्रण दिया, बल्कि उन्होंने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से पर्यटन-तीर्थाटन को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत भी की. मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात के दौरान बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि उत्तराखंड में 19 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू हो रही है. पीएम नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा निर्देश में श्री केदारनाथ धाम का भव्य पुनर्निर्माण हुआ है. इतना ही नहीं श्री बदरीनाथ धाम में पुनर्निर्माण का कार्य प्रगति पर है.
यूपी की जमीन के बदले उत्तराखंड में भूमि लेने का प्रस्ताव
आगे उन्होंने बताया कि श्री केदारनाथ धाम के कपाट इस साल 22 अप्रैल को खुल रहे हैं. जबकि श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुल रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को चारधाम यात्रा का निमंत्रण दिया. इस मुलाकात के दौरान हेमंत द्विवेदी ने मुख्यमंत्री को श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति की लखनऊ और हंसुआ-फतेहपुर की भवन एवं बगीचों के साथ ही जमीन को विनिमय कर उप्र सरकार में समाहित करने और उसके स्थान पर बीकेटीसी को हरिद्वार, देहरादून, ऋषिकेश में उप्र सरकार की उपलब्ध भूमि को देने का पत्र सौंप दिया.
कब खुलेंगे गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट
अब अगर बात करें चार धाम में से दो प्रमुख माने जाने वाले गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर की तो इन दोनों मंदिरों के कपाट अक्षय तृतीया पर 19 अप्रैल 2026 को भक्तों के दर्शन के लिए खुल जाएंगे.
6 महीने बंद रहते हैं केदारनाथ के कपाट
दरअसल, चार धाम में से एक बाबा केदारनाथ का मंदिर साल में 6 महीने दर्शन के लिए खुला रहता है. जबकि, सर्दियों की वजह से 6 महीने तक बंद रहता है. काफी उंचाई पर होने की वजह से यह धाम बर्फ की सफेद चादर से ढंक जाता है. यही वजह है कि दिवाली के बाद यहां कपाट बंद कर दिए जाते हैं. जैसे ही गर्मियों की शुरुआत होती है भक्तों के लिए बाबा का दरबार खुल जाता है.
