Uttarakhand zero tolerance on corruption: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई हो रही है. होमगार्ड्स वर्दी घोटाले सहित कई बड़े मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों पर निलंबन, गिरफ्तारी और जांच से यह साफ है कि सरकार जीरो टॉलरेंस नीति पर अडिग है.

Uttarakhand zero tolerance on corruption: उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्ती एक बार फिर सामने आई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कहा है कि अगर किसी ने भी गड़बड़ी की है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, कार्रवाई तय है. इसी नीति के तहत होमगार्ड्स वर्दी खरीद घोटाले में निदेशक होमगार्ड्स अमिताभ श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया है. मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच के लिए संयुक्त जांच समिति बनाने के आदेश भी दिए हैं. उनका कहना है कि सरकार जनता के भरोसे पर खरी उतरना चाहती है और इसके लिए भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार जरूरी है.
होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में वर्दी सामग्री की खरीद को लेकर अनियमितताओं की शिकायत शासन तक पहुंची थी. बताया गया कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं हुआ और पारदर्शिता नहीं बरती गई. यह मामला वित्तीय वर्ष 2024–25 और 2025–26 से जुड़ा है. रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने तुरंत कार्रवाई करते हुए निदेशक होमगार्ड्स को निलंबित कर दिया है. साथ ही पूरे मामले की गहराई से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार चाहती है कि सच्चाई सामने आए और जो भी दोषी हो, उस पर कड़ी कार्रवाई हो.
मुख्यमंत्री धामी ने दो टूक शब्दों में कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है. किसी भी स्तर पर गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उनका संदेश साफ है कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है. इसी सोच के साथ प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है. ताकि जनता का भरोसा बना रहे और गलत काम करने वालों में डर पैदा हो.
पिछले तीन वर्षों में धामी सरकार ने यह दिखा दिया है कि कार्रवाई सिर्फ छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगी. बड़े अधिकारी भी कानून के दायरे में लाए जाएंगे. कई मामलों में वरिष्ठ अफसरों पर निलंबन, गिरफ्तारी और विजिलेंस जांच जैसी सख्त कार्रवाई हुई है. हरिद्वार भूमि घोटाला, भर्ती घोटाला, वन विभाग, उद्यान, परिवहन, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन और कर विभाग जैसे मामलों में सरकार ने कड़े फैसले लिए हैं. पहले जिन नामों पर सवाल उठाने से लोग डरते थे, अब वही नाम जांच के घेरे में हैं.
हरिद्वार जमीन घोटाले में दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी समेत कुल 12 लोगों को सस्पेंड किया गया. यह एक बड़ा और चर्चित मामला था. इससे साफ हुआ कि सरकार किसी को बचाने के मूड में नहीं है. इसी तरह रामविलास यादव नाम के आईएएस अधिकारी को आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भेजा गया. किशन चंद नाम के आईएफएस अधिकारी को भी पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल जाना पड़ा. इन मामलों ने प्रशासन में हलचल मचा दी है.
भर्ती घोटाले के मामले में आरबीएस रावत, जो पहले आईएफएस अधिकारी रह चुके हैं और यूकेएसएसएससी के चेयरमैन भी थे, उन्हें भी जेल भेजा गया. बागवानी विभाग में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में उद्यान निदेशक हरमिंदर सिंह बवेजा को निलंबित किया गया. आयुर्वेद विश्वविद्यालय में वित्त नियंत्रक अमित जैन के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई. उन पर भ्रष्टाचार से जुड़े आदेशों की अनदेखी और नियमों के उल्लंघन का आरोप था. परिवहन निगम में उपमहाप्रबंधक वित्त भूपेंद्र कुमार को रिश्वत लेने और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप में सस्पेंड किया गया. उनके खिलाफ विजिलेंस जांच भी चल रही है.

राज्य के निचले स्तर के कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हुई है. लेखपाल महिपाल सिंह को रिश्वत मांगने के मामले में रंगे हाथ पकड़ा गया. उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है. पीसीएस अधिकारी निधि यादव के खिलाफ भी भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद विजिलेंस जांच शुरू की गई है. स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के उप निबंधक रामदत्त मिश्र को स्टांप शुल्क और भूमि पंजीकरण में अनियमितताओं के कारण निलंबित किया गया है. इन सभी मामलों ने साफ कर दिया कि सरकार किसी को भी नहीं छोड़ रही है.
राज्य कर विभाग में भी सख्त कदम उठाए गए हैं. विभाग के वरिष्ठ अधिकारी वीपी सिंह, डॉ. कुलदीप सिंह और यशपाल सिंह को कार्य में घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार के संदेह पर तुरंत सस्पेंड किया गया. सरकार का कहना है कि कर विभाग में पारदर्शिता बहुत जरूरी है. क्योंकि यह सीधे जनता के पैसे से जुड़ा मामला है. अगर यहां गड़बड़ी होगी तो नुकसान आम लोगों को होगा. इसलिए इस विभाग में भी सख्त निगरानी रखी जा रही है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में अब यह साफ हो चुका है कि भ्रष्टाचार के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है. कार्रवाई व्यक्ति नहीं, उसके काम के आधार पर हो रही है. सरकार का लक्ष्य है कि राज्य में ईमानदार और जवाबदेह शासन व्यवस्था बने. जहां नियमों से खिलवाड़ करने वालों को तुरंत सजा मिले. मुख्यमंत्री का कहना है कि भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड बनाना उनकी प्राथमिकता है. इसके लिए चाहे जितनी सख्ती करनी पड़े, सरकार पीछे नहीं हटेगी. जनता को भरोसा दिलाया गया है कि गलत काम करने वालों के लिए सिर्फ एक ही रास्ता है. सख्त कार्रवाई.
