Stone Truck Controversy: इंडियन यूथ कांग्रेस ने जंतर-मंतर और अपने दफ्तर के बाहर पत्थरों से भरा ट्रक खड़ा मिलने पर दिल्ली पुलिस की सुरक्षा और मंशा पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

Stone Truck Controversy: राजधानी नई दिल्ली में संसद मार्च के दिन यूथ कांग्रेस दफ्तर के बाहर खड़े पत्थरों से भरे ट्रक को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभानु चिब ने इस घटना पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया कि 20 जुलाई को पत्थरों से भरा एक ट्रक सबसे पहले जंतर-मंतर पर खड़ा देखा गया था. इसके बाद उस ट्रक को यूथ कांग्रेस दफ्तर के बाहर लाकर खड़ा कर दिया गया, जो 25 जुलाई तक वहीं खड़ा रहा.
कड़ी सुरक्षा के बावजूद संसद मार्ग तक कैसे पहुंचा ट्रक
यूथ कांग्रेस अध्यक्ष ने दिल्ली पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सीधे सवाल दागे हैं. उनका कहना है कि जब संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में जगह-जगह पुलिस चेकिंग हो रही थी और भारी बैरिकेड्स लगाए गए थे, तब पत्थरों से भरा यह ट्रक इतनी सुरक्षा के बीच से होकर दफ्तर तक कैसे पहुँच गया. उन्होंने सवाल किया कि यह काम किसके इशारे पर और किसके कहने पर किया गया था.
पुलिस की मंशा और साजिश पर यूथ कांग्रेस का आरोप
यूथ कांग्रेस का आरोप है कि विपक्ष के युवा संगठन के दफ्तर के बाहर इस तरह पत्थरों से भरा ट्रक खड़ा करने के पीछे दो ही मकसद हो सकते हैं. पहला यह कि प्रदर्शन के दौरान पथराव और हिंसा भड़काकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन को खत्म कराया जा सके. दूसरा यह कि पुलिस या आरएएफ के लोग इन पत्थरों का इस्तेमाल प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ करना चाहते थे. संगठन ने मांग की है कि दिल्ली पुलिस को इसका पूरा सच सामने लाना चाहिए.
सुरक्षा में चूक और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल
यूथ कांग्रेस ने पूछा है कि संसद भवन से महज़ 100 मीटर की दूरी पर सुरक्षा में इतनी बड़ी लापरवाही की इजाज़त किसने दी. भारी सुरक्षा वाले संवेदनशील इलाके में पत्थरों से भरे ट्रक को कई दिनों तक बिना किसी देखरेख के खुला छोड़ देना एक बहुत बड़ा खतरा था. संगठन ने सवाल उठाया कि इस लापरवाही के लिए आखिर कौन से अधिकारी जिम्मेदार हैं.
उपद्रव और हिंसा भड़कने का गंभीर खतरा
आईवाईसी नेतृत्व ने चिंता जताई कि अगर प्रदर्शन के दौरान कोई उपद्रवी या असामाजिक तत्व इन पत्थरों का इस्तेमाल हिंसा फैलाने के लिए कर लेता, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती. कई दिनों तक पुलिस कस्टडी की आड़ में इस तरह के ट्रक को सड़क पर खड़ा रखने का फैसला किसका था, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
दिल्ली पुलिस से ‘चेन ऑफ कमांड’ की निष्पक्ष जांच की मांग
यूथ कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस प्रशासन से मांग की है कि वे इस पूरे मामले में अपने ‘चेन ऑफ कमांड’ की जांच करें और जनता को स्पष्ट जवाब दें. संगठन का कहना है कि इतने संवेदनशील इलाके में बिना पुलिस की मर्जी या लापरवाही के ऐसा होना नामुमकिन है. अब देखना होगा कि इस मामले में पुलिस प्रशासन की तरफ से क्या आधिकारिक सफाई आती है.
