samudra-manthan: केंद्रीय कैबिनेट ने देश में तेल-गैस का घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 84,084 करोड़ रुपये की ‘समुद्र मंथन’ योजना को हरी झंडी दे दी है.

samudra-manthan: दुनिया भर में चल रहे ऊर्जा संकट के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय कैबिनेट ने 84,084 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को हरी झंडी दे दी है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत यह योजना वित्त वर्ष 2030-31 तक चलाई जाएगी. सरकार का मकसद भारत के समुद्री इलाकों से तेल और गैस निकालकर देश का घरेलू उत्पादन बढ़ाना है.
600 MMTOE से ज्यादा तेल-गैस खोजने का लक्ष्य
‘समुद्र मंथन’ योजना के तहत समुद्र के भीतर बड़े पैमाने पर खोजबीन की जाएगी. सरकार का अनुमान है कि इस कदम से देश के तेल और गैस भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट (MMTOE) से अधिक की बढ़ोतरी होगी. अपतटीय क्षेत्रों में वैज्ञानिक तरीकों से नए कुएँ खोजे जाएंगे. इससे भारत में तेल और गैस का उत्पादन कई गुना बढ़ जाएगा.
विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने की तैयारी
भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है. आजकल लाल सागर, काला सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री रास्तों पर तनाव की स्थिति बनी हुई है. ऐसे संकट के समय में सरकार देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना चाहती है. घरेलू उत्पादन बढ़ने से विदेश से आने वाले महंगे तेल पर भारत की निर्भरता काफी कम हो जाएगी.
आधुनिक तकनीक और ढाँचे पर होगा काम
यह पूरी योजना दो मुख्य हिस्सों पर काम करेगी. पहले हिस्से में समुद्र के नीचे का भूकंपीय (सीस्मिक) डेटा इकट्ठा करके उसकी जांच की जाएगी. दूसरे हिस्से में गहरे और बहुत गहरे समुद्र में तेज़ी से ड्रिलिंग की जाएगी. इसके अलावा समुद्र में तेल निकालने के लिए नए प्लैटफॉर्म, पाइपलाइन और मैन्युफैक्चरिंग जोन तैयार किए जाएंगे ताकि आधुनिक तकनीक से काम हो सके.
‘मेक इन इंडिया’ और रोज़गार को मिलेगा बढ़ावा
इस महायोजना से देश में बड़े पैमाने पर नए रोजगार पैदा होंगे. इससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को ज़बरदस्त ताकत मिलेगी. तेल और गैस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में नया निवेश आएगा. स्वदेशी तकनीक और मशीनों का इस्तेमाल बढ़ने से भारतीय उद्योगों को सीधा फायदा होगा और देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी.
विदेशी मुद्रा की बचत और जीडीपी में उछाल
घरेलू स्तर पर तेल का उत्पादन बढ़ने से हर साल भारत के अरबों डॉलर बचेंगे. अनुमान है कि इस योजना से सालाना 10 से 15 MMTOE अतिरिक्त तेल-गैस मिलेगा, जो आगे चलकर 20 MMTOE तक पहुँच सकता है. तेल आयात घटने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहेगा. इसका सीधा सकारात्मक असर देश की जीडीपी (GDP) और विकास दर पर दिखाई देगा.
