अरावली की पहाड़ियाँ दिल्ली में प्रदूषण की मुख्य वजह नहीं हैं, बल्कि ये दिल्ली-NCR के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करती हैं। अरावली रेंज जिसमें दिल्ली रिज शामिल है थार मरुस्थल से आने वाली गर्म हवाओं, रेत और धूल को रोकती है, जो दिल्ली के प्रदूषण को और बढ़ने से बचाती है। ये पहाड़ियाँ दिल्ली की “ग्रीन लंग्स कहलाती हैं, क्योंकि इनका हरा आवरण PM2.5 और दूसरे प्रदूषकों को फँसाता है और हवा को साफ रखने में मदद करता है।
अरावली में खनन प्रदूषण का असली कारण –
* पिछले कुछ दशकों में अवैध खनन, निर्माण और अतिक्रमण से अरावली का बड़ा हिस्सा नष्ट हो चुका है। इससे थार की धूल सीधे दिल्ली तक पहुँच रही है, जो सर्दियों में AQI को और खराब करती है।
* दिसंबर 2025 में दिल्ली का AQI सीवियर (400+) स्तर पर पहुँच चुका है कुछ दिनों पहले 500-600 तक, और जानकारों का कहना है कि अरावली की गिरावट से दिल्ली में धूल 30-40% तक हो सकता है।
* हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से अरावली की नई परिभाषा (100 मीटर से ऊँची पहाड़ियाँ ही संरक्षित) को मंजूरी देने से 90% क्षेत्र खनन के लिए खुल सकता है, जिससे प्रदूषण और बढ़ने की आशंका है।
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दिल्ली में प्रदूषण के प्रमुख कारण –
गाड़ियों से निकलने वाला धुआं , निर्माण धूल, उद्योग, पड़ोसी राज्यों से पराली जलाना हालाँकि की पराली का मामला 2025 में कम हुआ है
सर्दियों में ठंडी हवा और कम गति वाली हवाएँ प्रदूषकों को फँसाती हैं।
यहाँ अरावली पहाड़ियों में अवैध और वैध खनन से हुए विनाश की कई तस्वीरें हैं। ये तस्वीरें हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-NCR क्षेत्र की हैं, जहाँ खनन से पहाड़ियाँ कट रही हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है।

ये तस्वीरें खनन के कारण पहाड़ियों के कटाव, गड्ढों और विनाश को दर्शाती हैं। अवैध खनन लंबे समय से समस्या बना हुआ है, जो दिल्ली के प्रदूषण को भी बढ़ाता है।
दिल्ली में कहाँ से कहाँ तक फैली है अरावली पहाड़ियाँ।

अरावली की पहाड़ियाँ दिल्ली में दिल्ली रिज के रूप में मौजूद हैं, जो अरावली पर्वतमाला की उत्तरी विस्तार है। ये दिल्ली के दक्षिण से उत्तर की ओर फैली हुई हैं, लगभग 35 किलोमीटर लंबाई में।
दक्षिण से: तुगलकाबाद और भट्टी माइंस क्षेत्र से शुरू होकर, असोला भट्टी वन्यजीव अभयारण्य तक।
उत्तर तक: यमुना नदी के किनारे वजीराबाद तक।

ये रिज दिल्ली को चार मुख्य भागों में बांटता है ।
* दक्षिणी रिज-असोला भट्टी क्षेत्र।
* दक्षिण-मध्य रिज – वसंत कुंज, जेएनयू, संजय वन के आसपास।
* मध्य रिज- राष्ट्रपति भवन (रायसीना हिल), धौला कुआँ के आसपास।
* उत्तरी रिज- दिल्ली विश्वविद्यालय के पास।
ये पहाड़ियाँ दिल्ली की “फेफड़े” कहलाती हैं, क्योंकि ये राजस्थान की गर्म हवाओं और धूल से शहर की सुरक्षा करती हैं।
