bhadohi cyber crime 10 crore fraud: भदोही पुलिस ने ₹10 करोड़ की साइबर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन युवकों को गिरफ्तार किया है, जो लोन दिलाने के बहाने लोगों के बैंक खाते हथियाकर धोखाधड़ी का पैसा ट्रांसफर करते थे। इस गिरोह के खिलाफ देशभर में 545 शिकायतें दर्ज हैं और जांच में ठगी का कुल आंकड़ा ₹50 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है.

bhadohi cyber crime 10 crore fraud: Uttar Pradesh के Bhadohi जिले में पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा किया है. इस मामले में तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार आरोपियों के नाम अंशुल मिश्रा, कपिल रावत और मोहम्मद शोएब बताए जा रहे हैं. इनकी उम्र केवल 19 से 21 साल के बीच है. पुलिस के अनुसार इन युवकों ने मिलकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया. यह पूरा मामला तब सामने आया जब Gyanpur इलाके के एक रेहड़ी-पटरी लगाने वाले युवक अमन बिंद ने शिकायत दर्ज कराई. उसने बताया कि उसके और उसकी बहन के बैंक खातों का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया. इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और पूरे गिरोह का भंडाफोड़ हो गया.
जांच में पता चला कि यह गिरोह लोगों को सरकारी योजनाओं के तहत लोन दिलाने का लालच देता था. इसी बहाने लोगों से बैंक खाते खुलवा लिए जाते थे. जब खाते खुल जाते थे तो आरोपी उनसे एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल नंबर अपने पास रख लेते थे. इसके बाद उन्हीं खातों का इस्तेमाल ठगी के पैसों को इधर-उधर भेजने में किया जाता था. पुलिस के मुताबिक इन खातों के जरिए कई राज्यों में धोखाधड़ी की रकम ट्रांसफर की गई. इसमें Delhi, Rajasthan और Jharkhand जैसे राज्यों के नाम सामने आए हैं. अब तक करीब 10 करोड़ रुपये की ठगी की पुष्टि हो चुकी है.
पुलिस अधीक्षक Abhinav Tyagi ने बताया कि गिरोह का एक सदस्य अस्तित्व वर्मा उर्फ रौनक लोगों से दोस्ती करके उन्हें अपने जाल में फंसाता था. वह खुद को मददगार बताकर सरकारी योजना के तहत लोन दिलाने का भरोसा दिलाता था. इसी तरीके से उसने अमन बिंद से भी संपर्क किया था. इसके बाद बैंक खाते खुलवाए गए और उन खातों से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए गए. बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से आए पैसे को छिपाने और ट्रांसफर करने में किया जाता था.
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अपना नेटवर्क चलाता था. आरोपी WhatsApp, Telegram और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर ग्रुप बनाकर बैंक खातों की जानकारी साझा करते थे. इसके अलावा लोगों को ऑनलाइन शॉपिंग और क्रेडिट सुविधा देने के नाम पर एपीके फाइलें भेजी जाती थीं. जब लोग इन्हें डाउनलोड करते थे तो उनके फोन और बैंक से जुड़ी जानकारी अपराधियों तक पहुंच जाती थी. पुलिस ने आरोपियों के पास से चार एंड्रॉइड फोन भी जब्त किए हैं. इनमें कई राज्यों के बैंक खातों का डेटा मिला है.
जांच में यह भी पता चला कि इन खातों के खिलाफ National Cyber Crime Reporting Portal पर पहले ही 545 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं. पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी ठगी की रकम और भी ज्यादा हो सकती है. अनुमान है कि यह आंकड़ा 50 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. आरोपी ठगी की रकम एटीएम से निकालते थे. कई बार पेट्रोल पंपों और डिजिटल माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जाता था. इसके अलावा कुछ रकम क्रिप्टोकरेंसी चैनलों के जरिए भी ट्रांसफर की जाती थी. इस गिरोह में कुल पांच सदस्य बताए जा रहे हैं. फिलहाल दो अन्य आरोपी पुलिस की तलाश में हैं और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है.
