NEET पेपर खरीदने वाले मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है. दरअसल, जांच में खुलासा हुआ हैं कि दिनेश के बेटे ने 12वीं के बाद में पढ़ाई को छोड़ दिया था. पढ़ाई में वह बेहद की कमजोर था. हालांकि, इसके बावजूद परिवार वालों ने अपने बेटे से नीट की परीक्षा देने के लिए बोला था.
जांच में कई बड़े खुलासे किए गए है. दरअसल, पिछले साल विकास बिवाल अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई मधोपुर मेडिकल कॉलेज से कर रहा है. वह प्रथम वर्ष का छात्र है. वहीं, कॉलेज प्रशासन ने पूछताछ में बताया कि विकास पढ़ाई में काफी कमजोर है. साथ ही कॉलेज में आना जाना भी उसका काफी कम हुआ करता था. बात करें कॉलेज में हाजिरी की, तो वह जनवरी से लेकर अप्रैल तक केवल 10 दिन ही थी. प्रथम सेमेस्टर में विकास ने केवल 30 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. कॉलेज को लोगों को पहले से ही उस पर शक था. वह बार-बार उसके मेडिकल कॉलेज के दाखिले को लेकर सवाल भी उठा रहे थे.
जांच पड़ताल के दौरान उसने स्वीकार किया कि उसे NEET 2025 का पेपर काफी पहले ही मिला हुआ था. इससे पता चल रहा हैं कि सालों से नीट के पेपर लीक होते रहे हैं. इसके अलावा एक और खुलासा हुआ है. दरअसल, दिनेश के घर से लगभग चार लोग एक ही बार में नीट की परीक्षा देकर निकले थे. एक ही परिवार के चारों लोगों के नीट की परीक्षा का निकलना काफी शक करवाने वाला था. जांच करने वालों का कहना हैं कि राजस्थान का कोचिंग हब सीकर इस पेपर लीक के रैकेट के पीछे में हो सकता है.
जानकारी के अनुसार, यह लीक का खेल कई सालों से खेला जा रहा है. महाराष्ट्र के अहिल्याबाई के धनंजय से यह पेपर नासिक निवासी शुभम खैरनार तक जाता उसके बाद में हरियाणा के यश यादव तक. यश सीकर से नीट की तैयारी कर रहा था. इसी बीच उसकी मुलाकात विकास से हुई, जिसके बाद दिनेश का परिवार इस से जुड़ा. इस साल पैसे के लालच में यह पूरा मामला बेटे की वजह से खुल पाया, नहीं तो इस साल भी सीट का कोई असली हकदार वंजित रह जाता.
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