Mathura News: अपने बेबाक बयानों के लिए मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी-मथुरा विवाद को लेकर एक बहुत बड़ा बयान दिया है. मथुरा पहुंचे कुमार विश्वास ने धार (मध्य प्रदेश) की भोजशाला के मामले का उदाहरण देते हुए देश के अल्पसंख्यक समाज के सामने सौहार्द की एक नई मिसाल पेश करने का प्रस्ताव रखा है. कुमार विश्वास ने स्वतः ही मंदिरों के स्थानों को छोड़ने की अपील की है. इसके साथ ही असदुद्दीन ओवैसी को सलाह दी कि वह अपने कुल को पढ़ें. वह भी हमारे साइड खड़े थे.
ओवैसी के बयान पर कुमार विश्वास का पलटवार
इस पूरे घटनाक्रम के बीच देश के मशहूर कवि और विचारक डॉ. कुमार विश्वास ने भी मथुरा में एक बड़ा बयान देकर इस चर्चा को और गरमा दिया है. धार की भोजशाला पर आए अदालती फैसले पर खुशी जताते हुए उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन के संघर्ष के दिनों को याद किया. साथ ही उन्होंने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयानों पर तीखा पलटवार किया. उन्होंने कहा कि ओवैसी पढ़े-लिखे आदमी हैं. लेकिन उनके बयानों से भ्रम होता है. ओवैसी साहब को इतिहास का गहरा अध्ययन करना चाहिए. उन्हें अपने कुल वंश के इतिहास को भी पढ़कर देखना चाहिए. अगर वह अपने पूर्वजों का इतिहास खंगालेंगे तो उन्हें साफ समझ आ जाएगा कि उनके परदादा भी इसी तरफ खड़े थे.
अपने संबोधन में डॉ. कुमार विश्वास ने देश के प्रधानमंत्री द्वारा देशवासियों से की गई अपीलों का पुरजोर समर्थन किया. मथुरा और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के संवेदनशील विवाद पर बात करते हुए उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण और शांतिपूर्ण रास्ता सुझाया. उन्होंने मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों और आम लोगों से अपील की कि वे खुद आगे आएं और अपनी ओर से पहल करते हुए इस धार्मिक स्थल को हिंदू पक्ष को सौंपने का बड़ा दिल दिखाएं. उनका मानना है कि इस तरह की पहल से समाज में आपसी भाईचारा, सौहार्द और देश की एकता को एक नई मजबूती मिलेगी.
MP हाईकोर्ट ने भोजशाला को हिंदू मंदिर करार दिया
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने धार भोजशाला मामले पर फैसला सुनाते हुए इसे मंदिर के तौर पर मान्यता दे दी है. कोर्ट ने ASI के 98 दिन चले सर्वेक्षण को सही मानते हुए भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर करार दिया. हाईकोर्ट के इस फैसले पर AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने विरोध जताया और इसे बाबरी मस्जिद पर दिए फैसले से जोड़ दिया. ओवैसी ने कहा कि ये फैसला संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है.
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