अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. बता दें कि ईरान की शीर्ष सयुंक्त कमान द्वारा गुरुवार के दिन एक बड़ा फैसला लिया गया है. उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरीके से बंद कर दिया है. अब किसी भी जहाज या तेल टैंकर को वहां से जाने की अनुमति नहीं है. अगर कोई भी कारोबारी जहाज या तेल टैंकर वहां से जाने की कोशिश करता है, तो उस पर हमला किया जाएगा. बता दें कि यह मार्ग कारोबार की दृष्टि से सबसे अहम मार्गों में से एक माना जाता है. इसी मार्ग से वैश्विक तेल की आपूर्ति को पूरा किया जाता है. ऐसे में भारत के साथ-साथ कई देशों में तेल और कई चीजों के आयात निर्यात में मुश्किलें पैदा हो सकती है.
एक और ईरान का दावा, तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका का दावा. अमेरिकी नौसिनिक का कहना हैं कि हार्मुज अभी पूरी तरीके से बंद नहीं हुआ है. न ही उस पर कोई हमला हुआ है.
हालांकि, हालत जो भी हो. अगर ईरान द्वारा हार्मुज बंद किया जाता है, तो उसका भारत पर काफी असर पड़ेगा. आइए जानें कि भारत में क्या असर पड़ेगा.
दरअसल, भारत के पास में अभी केवल 74 दिन का ही स्ट्रैटिजिल ऑयल रिजर्व है. भारत का आधे से ज्यादा कच्चा तेल वहीं से आता है. लगभग 60 फीसदी कच्चा तेल वहां से आता है. वहीं, 40 फीसदी LPG हार्मुज से आता है. हार्मुज के रूट से इराक, सऊदी, कुवेत और यूएई से तेल इम्पोर्ट होकर आता है.
बाकी का बचा 35 फीसदी तेल हार्मुज से नहीं आता है, बल्कि यह रूस से आता है. कई लोगों को लगता हैं कि हार्मुज से तेल नहीं आ पाएगा, तो रूस भारत की मदद करेगा. हालांकि, ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता है. दरअसल, रूस के पास भी इतना एक्सट्रा ऑयल देने की क्षमता नहीं है.
अगर बात करें अन्य देशों से मदद लेने के कि तो उसमें गुयाना ब्राजी और यूएस आता है. हालांकि, उनसे तेल लेना भारत को काफी भारी पड़ सकता है. दरअसल, वहां से तेल आने में भारत को 40 दिन का समय लगेगा. समय के साथ-साथ महंगा भी पड़ेगा.
भारत के मंगलौर, SPR रिजर्व विशाखापत्तनम और पादुर को मिलाकर भारत में 9 दिन के बराबर रिजर्व है.
ऐसे में आने वाले समय में पेट्रोल की कीमत 140 या 150 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 130 रुपये प्रति लीटर हो सकती है. संभावना हैं कि तेल की कीमत इससे भी ज्यादा बढ़ सकते हैं.
