Jamaat protest: जमात ए इस्लामी और 11 अन्य बांग्लादेशी विपक्षी दलों ने भारत पर जबरन ‘पुश इन’ करने का आरोप लगाते हुए 12 जून से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बड़े विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है. दूसरी तरफ, भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए साफ किया है कि दोनों देशों की तय कानूनी व्यवस्था के तहत सिर्फ अवैध प्रवासियों को ही वापस भेजा जा रहा है.

Jamaat protest: भारत और बांग्लादेश की सीमा पर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी और तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है. बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी जमात ए इस्लामी और उसके साथ जुड़े 11 विपक्षी दलों के गठबंधन ने भारत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. इस पूरे गठबंधन ने भारत बांग्लादेश बॉर्डर पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है. इस आंदोलन में शेख हसीना विरोधी छात्र आंदोलन से निकली नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) भी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है. इन सभी विपक्षी दलों का आरोप है कि भारत सरकार जबरन लोगों को सीमा पार बांग्लादेश की तरफ धकेल रही है. इसके साथ ही उनका दावा है कि सीमा के पास आए दिन बांग्लादेशी नागरिकों की जान जा रही है.
इस बड़े विरोध प्रदर्शन की पूरी रूपरेखा जमात ए इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान की अगुवाई में तैयार की गई है. गठबंधन के नेताओं ने घोषणा की है कि 12 जून को बांग्लादेश के सभी सीमावर्ती जिलों और मुख्य चेकपोस्टों पर भारी विरोध रैलियां निकाली जाएंगी. बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं होगी. इसके बाद 15 जून को देश की राजधानी ढाका की सड़कों पर एक बहुत बड़ा जुलूस निकाला जाएगा और विरोध सभा होगी. विपक्षी दलों ने अपनी ही देश की बीएनपी सरकार पर भी निशाना साधा है. उनका कहना है कि सरकार भारत के सामने जरूरत से ज्यादा नरम रुख अपना रही है और सीमा पर अपने नागरिकों की रक्षा करने में नाकाम साबित हुई है.
बांग्लादेश की राजनीति में आजकल ‘पुश इन’ शब्द को लेकर बहुत बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. बांग्लादेशी नेता भारत की इस कार्रवाई को ‘पुश इन’ कह रहे हैं, जिसका मतलब है अवैध रूप से लोगों को वापस भेजना. हाल ही में नई दिल्ली में दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बलों (BSF और BGB) के बीच महानिदेशक स्तर की बैठक हुई थी. इस बैठक में भी बांग्लादेश की तरफ से यह मुद्दा काफी जोर शोर से उठाया गया था. जमात के नेताओं का दावा है कि पिछले तीन महीनों में सीमा पर 50 से ज्यादा ऐसी घटनाएं हुई हैं. उनके अनुसार करीब ढाई हजार लोगों को भारत से बांग्लादेश भेजने की कोशिश की गई है.
दूसरी तरफ, भारत सरकार ने बांग्लादेश के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. भारतीय अधिकारियों का साफ कहना है कि भारत किसी भी व्यक्ति को जबरन सीमा पार नहीं भेज रहा है. भारत केवल उन विदेशी नागरिकों को वापस भेज रहा है जो अवैध तरीके से देश में रह रहे हैं. यह पूरी कार्रवाई तय कानूनी प्रक्रिया और दोनों देशों के बीच बनी आपसी व्यवस्था के तहत ही की जा रही है. वापस भेजने से पहले बकायदा नागरिकता का वेरिफिकेशन भी किया जा रहा है. भारत के विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश से अपील की है कि वे इस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को थोड़ा तेज करें ताकि कानूनन प्रवासियों की घर वापसी का काम आसान हो सके.
गौरतलब है कि भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है. यह भारत की किसी भी पड़ोसी देश के साथ सबसे लंबी जमीनी सीमा है. असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में हाल के दिनों में अवैध प्रवासियों की पहचान करने का अभियान काफी तेज हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल के होल्डिंग सेंटरों से लगभग 4,800 अवैध प्रवासियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी करके वापस बांग्लादेश भेजा जा चुका है. अब बांग्लादेश के इस्लामी दल इस कानूनी और सरकारी मुद्दे को आम जनता के बीच ले जाकर सड़कों पर बड़ा हंगामा खड़ा करने की तैयारी में जुटे हैं.
