बंगाल की सियासत में एक बेहद चौंका देने वाला मामला सामने आया है। कोलकाता के अलीपुर में उस सरकारी बिल्डिंग में आग लग गई जहां 4000 EVM की पेटियां रखी थीं। पूरी मशीनें जलकर खाक हो गईं, ये आग उसी मंजिल पर लगी क्यों लगी जहां EVM रखा हुआ था, इसके पीछे किस की साजिश है? क्योंकि ये वही EVM हैं जो 10 विधानसभा सीटों पर इस्तेमाल की गई थीं और जिस तरीके से आम आदमी पार्टी और कांग्रेस आरोप लगा रही है कि बंगाल चुनाव में कुछ गड़बड़ हुआ था, कहीं उस गड़बड़ी को छिपाने और सबूत मिटाने के लिए ये आग तो नहीं लगवाई गई? आखिर उस बिल्डिंग में आग लगी कैसे? उसके पीछे कारण क्या था? सवाल बहुत हैं, अब सवाल ये है कि ये आग लगी थी या लगवाई गई थी? और क्या आगे भी सबूत मिटाने के लिए ऐसी आग लगती रहेंगी? आइए समझते हैं द ट्रुथ 24 की इस रिपोर्ट में…

4000 EVM जलकर खाक
पश्चिम बंगाल के कोलकाता के अलीपुर में एक बहुमंजिला सरकारी इमारत में भीषण आग लग गई, इस आग में लगभग 4,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें और वीवीपैट पूरी तरह से जल कर खाक हो गई हैं, इन मशीनों का इस्तेमाल मई 2026 में हुए राज्य के विधानसभा चुनावों के दौरान 10 निर्वाचन क्षेत्रों में किया गया था। हैरानी की बात ये है कि, आग लगने का तरीका भी संदेह वाला है, बिल्डिंग के बीच का फ्लोर सुरक्षित बच गया, लेकिन ऊपरी और निचली मंजिलें जल गईं, इसी वजह से किसी बड़ी साजिश का अंदेशा जताया जा रहा है, पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है और एक विशेष जांच दल SIT मामले की गहन जांच कर रहा है।
अभिषेक बनर्जी के गढ़ की थी ये 10 सीटें
आग में जल कर खांक हुए ये 4,000 EVM मुख्य रूप से दक्षिण 24 परगना जिले की 10 विधानसभा सीटों से जुड़ी थीं। तृणमूल कांग्रेस और कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें से कुछ प्रमुख विधानसभा क्षेत्र हैं कसबा, जादवपुर, बेहाला पूर्व, बेहाला पश्चिम, मेटियाबुर्ज, सातगाछिया और डायमंड हार्बर सब-डिवीजन के अंतर्गत आने वाली सीटें, यह पूरा क्षेत्र तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का गढ़ माना जाता है, इस घटना के बाद इन हाई-प्रोफाइल सीटों पर हुए मतदान के सबूतों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है, सवाल उठ रहा है कि आखिर इन्हीं 10 सीटों की EVM क्यों जलीं? क्या ये महज इत्तेफाक है या सोची-समझी साजिश?
चुनाव नतीजे पलटे फिर लगी आग
मई 2026 में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इन 10 सीटों समेत पूरे राज्य के नतीजों में एक बड़ा ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल करके राज्य में सरकार बनाई, जिन 10 प्रमुख विधानसभा सीटों की EVM आग में जल गई, उनमें से ज़्यादातर सीटें पहले तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाती थीं। कसबा, जादवपुर, बेहाला पूर्व और बेहाला पश्चिम जैसी हाई, प्रोफाइल शहरी सीटों पर इस बार BJP के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। पिछले चुनावों में ये सीटें TMC का अभेद्य किला थीं, लेकिन इस साल के चुनाव में भाजपा की लहर के कारण यहां समीकरण पूरी तरह बदल गए, डायमंड हार्बर सब-डिवीजन की सीटों पर भी व्यापक बदलाव देखने को मिला।
फाल्टा सीट पर चुनाव के बाद दोबारा वोटिंग हुई थी, रिपोर्ट के अनुसार BJP के देवांग्शु पांडा ने 1 लाख से अधिक वोटों के रिकॉर्ड अंतर से ऐतिहासिक जीत हासिल की, इस सीट पर TMC के प्रत्याशी जहांगीर खान ने बाद में मुकाबला छोड़ दिया था, मेटियाबुर्ज और सातगाछिया जैसी सीटों पर भी कांटे की टक्कर के बाद BJP के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी, पूरे पश्चिम बंगाल की बात करें तो भाजपा ने कुल 294 सीटों में से 207 सीटों पर विशाल जीत दर्ज की। इस चुनाव परिणाम के बाद शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सिमटकर केवल 80 सीटों पर रह गई और 15 साल बाद उनकी सत्ता का अंत हुआ, इन्हीं चुनावी नतीजों के ठीक एक महीने बाद इन 10 सीटों की ईवीएम मशीनों में रहस्यमयी आग लगना कई सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पहले से आरोप लगा रही थी कि, बंगाल चुनाव में गड़बड़ी हुई है। अब सबूत ही जल गए, क्या ये आग महज हादसा थी? या फिर हार-जीत के सबूतों को मिटाने की साजिश? अगर बीच का फ्लोर बच गया तो EVM वाला फ्लोर ही कैसे जल गया? क्या किसी ने जानबूझकर आग लगवाई ताकि दोबारा गिनती न हो सके? SIT जांच कर रही है। लेकिन जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक सवाल बना रहेगा कि आग लगी थी या लगवाई गई थी। बंगाल की जनता सच जानना चाहती है। क्योंकि 4000 EVM का जलना सिर्फ मशीनों का जलना नहीं है, ये लोकतंत्र के सबूत का जलना है।
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