ममता बनर्जी को हाईकोर्ट की तरफ से एक बार फिर झटका लगा है. दरअसल, हाईकोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के मामले पर अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है. साथ ही स्पीकर के फैसले को बरकरार रखा है.
पार्टी में ही आपसी मतभेद
जानकारी के मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर TMC के अंदर दो अलग-अलग गुट बने हुए थे. दोनों दलों ने अपने-अपने नेता प्रतिपक्ष के उम्मीवदार के नाम प्रस्तावित किए थे. एक गुट बागी उम्मीदवारों का है, तो वहीं, दूसरा पार्टी की करीबी का है. बागी विधायक द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाने का फैसला था. वहीं, पार्टी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय का नाम आगे दिया था. दोनों गुटों ने अपने-अपने नेता प्रतिपक्ष के नाम आगे दिए थे.
कलकत्ता हाईकोर्ट का खटखटाया दरवाजा
दोनों के प्रस्ताव मिलने के बाद में पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष ने ऋतब्रत बनर्जी के नाम को मंजूरी दी, जिसके बाद उनकी नियुक्ति की गई थी. इसी फैसले को चुनौती देते हुए शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रूख किया. जस्टिस कृष्णा राव ने काफी विचार करने के बाद में कहा कि इस चरण में अभी कोई भी अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जाएगा और स्पीकर के निर्णय को ही फिलहाल माना जाएगा.
कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपने-अपने हलफनामे को दाखिल करने बोला है. दो हफ्ते के अंदर इसे जमा करने का निर्देश दिया है. उसी आधार पर 28 जुलाई 2026 को मामले की अगली सुनवाई की जाएगी. फिलहाल नेता प्रतिपक्ष के पद पर ऋतब्रत बनर्जी ही बने रहेंगे. सभी की नजरें अब अदालत की अगली सुनवाई पर ही टिकी हुई है. पार्टी के अंदर की ही गुटबाजियों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में तहलका मचा कर रख दिया है.
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