मुंबई कोर्ट ने एक नाबालिग आरोपी को री-नीट एग्जाम की परीक्षा में शामिल होने के लिए अस्थायी जमानत दे दी है. यह फैसला विशेष पॉक्सो कोर्ट ने लिया है. हालांकि, यह जमानत कुछ नियमों और शर्तों के आधार पर दी गई है.
दरअसल, 18 साल के इस युवक पर नाबालिग लड़की का रेप करने का आरोप है. आरोपी पर BNS की संबंधित धारा और POCSO ACT 2012 के तहत मामला दर्ज है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट से उसे जेल की सुनाई थी. इसी बीच आरोपी ने जमानत की डिमांड की और कहा कि उसे परीक्षा में बैठना है. इसके अलावा आरोपी ने कहा कि पेपर की तैयारी करने के लिए भी थोड़ा समय चाहिए.
आरोपी की जमानत की मांग के बाद में उसे कुछ शर्तों पर छोड़ने का फैसला लिया गया. आरोपी के वकील ने कहा कि क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम का काम जेल में अपराधियों का सुधार करना है. इसी कारण से उसे अपनी गलती सुधारने का अवसर मिलना चाहिए. साथ ही पेपर में बैठने के साथ-साथ उसकी तैयारी करने का समय भी मिलना चाहिए. पुलिस एस्कॉर्ट में रहकर तैयारी करना उसके लिए मानसिक तनाव पैदा करेगा, जिसके बाद कोर्ट ने उसे एक मौका दिया.
कोर्ट ने इन शर्तों पर छोड़ा
दरअसल, कोर्ट ने आरोपी को 18 जून से 21 जून तक जमानत पाने के लिए 50,000 रुपये के बॉन्ड और 50,000 रुपये की जमानत श्योरिटी देने के लिए बोला. जज एस आर शर्मा ने रेप सर्वाइवर से ‘नो ऑब्जेक्शन’ लिया. कोर्ट ने आरोपी को पीड़िता के परिवार से किसी भी तरीके से संपर्क करने के लिए भी मना किया. टेस्ट की तैयारी और पेपर देने के बाद में आरोपी को 22 जून, 2 बजे से पहले सरेंडर देना होगा.
हालांकि, युवक के खिलाफ में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर चैत्राली पंशिकर ने याचिका दायर की है. उनका कहना हैं कि बस पेपर देने के लिए आरोपी को जमानत मिलनी चाहिए.
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