राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकरअब सरगर्मी काफी बढ़ गई है. दौसा में कुछ प्रत्याशियों ने चुनाव चिह्न को लेकर काफी विरोध जताया है. प्रत्याशियों को चप्पल चुनाव चिह्न मिला है, जिसे वे सभी लोग अशुभ बता रहे हैं.
राजस्थान के दौसा में चुनाव चिह्न को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि यहां निकाय चुनाव में कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह के रूप में चप्पल आवंटित किया गया है, अब इसको लेकर प्रत्याशियों ने विरोध जताया है. प्रत्याशियों का कहना है कि निर्वाचन आयोग को चप्पल चुनाव चिह्न सेकंड ऑप्शन पर नहीं रखना चाहिए था. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि वो चप्पल चुनाव चिह्न को शुभ नहीं मानते, लेकिन फिर भी उन्हें ये चुनाव चिह्न जबरदस्ती दिया जा रहा है.
अपनी पसंद का चाहते चुनाव चिन्ह
जानकारी के मुताबिक उम्मीदवार अपनी पसंद का चुनाव चिह्न चाहता है, लेकिन प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न के रूप में चप्पल मिल गया है, जिसपर उन्होंने नाराजगी जताई है. आपको बता दें कि चुनाव चिह्न की सूची में पहले नंबर पर अलमारी और दूसरे नंबर पर चप्पल होने के कारण अधिकतर निर्दलीय प्रत्याशियों को चप्पल चुनाव चिह्न ही आवंटित किया जा रहा है. इसपर रिटर्निंग अधिकारी संजू मीणा ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक ही प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जा रहे हैं.
अलग चुनाव चिह्न को नामांकन में भरा
रिटर्निंग अधिकारी संजू मीणा ने कहा कि प्रत्याशियों को क्रमवार ही चुनाव चिह्न बांटे जा रहे हैं. उनका कहना है कि कुछ प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र में ऐसे चुनाव चिह्न भर दिए थे, जो आयोग द्वारा जारी की गई 40 चुनाव चिह्नों की लिस्ट में थे ही नहीं, ऐसे में उनकी पसंद के चुनाव चिह्नों को उन्हें देना संभव नहीं था. जिसके कारण क्रम संख्या के आधार पर चुनाव चिह्न दिए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले प्रत्याशी को अलमारी और दूसरे प्रत्याशी को चप्पल चुनाव चिह्न का आवंटन हो रहा है.
शुभ-अशुभ के नजरिये से बात
अब इस मामले को लेकर प्रत्याशियों ने इसका विरोध किया है. प्रत्याशी इसे शुभ-अशुभ के नजरिए से देख रहे हैं, जबकि चुनाव अधिकारियों का कहना है कि राज्य निर्वाचन आयोग की तय की गई गाइडलाइन के मुताबिक ही सारी प्रक्रियाएं हो रही हैं, जिसमें चुनाव चिह्न का आवंटन भी शामिल है. ऐसे में यह मामला न सिर्फ दौसा बल्कि पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बन गया है.
