मुंबई की मेयर के ऊपर कोर्ट ने जुर्माना लगाकर कार्रवाई की है. यह पूरा मामला साल 2016 का है. कोर्ट ने मेयर को अगली तारीख़ पर पेश होने के आदेश दिया है. साथ ही जुर्माने को एक सप्ताह में जमा कराने का भी आदेश दिया गया है.
मुंबई की मेयर रितु तावड़े पर कोर्ट ने एक हजार रूपये का जुर्माना लगाया है. जानकारी के मुताबिक़ उनके ख़िलाफ़ यह कार्रवाई मारपीट के एक दस साल पुराने मामले में की गई है. बताया जा रहा है कि जुर्माना इसलिए लगाया गया क्योंकि वह कोर्ट में पेश नहीं हुईं. कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर वह अगली सुनवाई में शामिल नहीं होती हैं, तो वारंट जारी किया जा सकता है और उनके जमानत बॉन्ड रद्द किए जा सकते हैं.
कोर्ट ने की टिप्पणी
इस मामले को लेकर एडिशनल सेशंस जज जी.जी. भंसाली ने कहा कि घटना साल 2016 में हुई थी और चार्जशीट 2017 में दाखिल की गई थी, लेकिन इस मामले में अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं. नवंबर के पहले सप्ताह में आरोप तय होने की संभावना है. जज ने कहा कि रितु तावड़े और दो अन्य आरोपियों का बार-बार गैर-हाजिर रहना यह दिखाता है कि वे मुकदमे को लंबा खींचना चाहते हैं.
वकील ने कोर्ट में रखी दलील
जानकारी के मुताबिक इससे पहले की सुनवाई में कोर्ट ने मेयर पर तीन सौ का जुर्माना लगाया था. इस दौरान उन्होंने मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट मांगी थी. अब जब इस मामले में बुधवार को सुनवाई हुई, तो तावड़े और दो अन्य आरोपियों ने फिर से पेशी से छूट का अनुरोध किया. तावड़े की वकील दुर्गा राजपूत ने कहा कि मेयर मुंबई की ‘प्रथम नागरिक’ होने के नाते उनका शेड्यूल बहुत व्यस्त रहता है, और उन्हें बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होना पड़ता है.
अन्य आरोपियों ने दिया तर्क
वहीं इस मामले को लेकर अन्य दो आरोपियों ने कहा कि वे समाज सेवक हैं और उनका शेड्यूल भी काफी व्यस्त रहता है. उनकी अर्ज़ी का विरोध करते हुए, एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर इकबाल सोलकर ने तर्क दिया कि यह मामला कई साल पुराना है और आरोपी जानबूझकर कोर्ट में पेश होने से बच रहे हैं.
एक सप्ताह में जमा करना होगा जुर्माना
इस मामले में एडिशनल सेशंस जज भंसाली ने उनकी अर्जी मंजूर कर ली, लेकिन मेयर पर एक हजार रूपये का जुर्माना लगाया. यह जुर्माना आदेश के एक सप्ताह के भीतर सरकारी खजाने में जमा करना होगा. हालांकि जज ने जोर देकर कहा कि आरोप तय करने के लिए अगली तारीख 2 नवंबर को कोर्ट में आरोपियों की मौजूदगी अनिवार्य है.
कोर्ट ने दिया सुझाव
कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश में चेतावनी दी गई है कि अगर वे जज के सामने पेश नहीं होते हैं, तो कोर्ट वारंट जारी करेगा और उनके जमानत बॉन्ड रद्द कर देगा. हालांकि कोर्ट ने सुझाव दिया कि आरोप तय होने के बाद आरोपी पेशी से स्थायी छूट के लिए आवेदन कर सकते हैं.
साल 2016 का है पूरा मामला
आपको बता दें कि यह पूरी घटना 29 जुलाई साल 2016 को वकोला इलाके में BMC द्वारा चलाए जा रहे उर्दू-मीडियम स्कूल में हुई थी. अभियोजन पक्ष का आरोप है कि रितु तावड़े, जो उस समय कॉर्पोरेटर थी और छह अन्य लोग स्कूल में घुसे और कैंसर से पीड़ित एक टीचर के ट्रांसफर को लेकर स्कूल मैनेजमेंट के साथ तीखी बहस की. वहीं मामले को लेकर पुलिस का दावा है कि बहस के दौरान आरोपियों ने मैनेजमेंट के साथ बदसलूकी की और दो अन्य टीचरों के साथ मारपीट की. इस मामले में 11 अगस्त 2016 को FIR दर्ज की गई थी.
