humanitarian trade: डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ ऐलान से बाजारों में हलचल है, लेकिन भारत का ईरान से व्यापार सीमित और मानवीय जरूरतों तक ही है. भारत खाद्य सामग्री और दवाओं जैसे जरूरी सामान भेजता है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अतिरिक्त टैरिफ लगने की संभावना कम मानी जा रही है.

humanitarian trade: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है. इस फैसले के बाद दुनियाभर के बाजारों में हलचल मच गई है. भारत में भी यह सवाल उठने लगा कि क्या इसका असर भारत के ईरान के साथ व्यापार पर पड़ेगा. इसी बीच भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने स्थिति साफ की है. उन्होंने कहा कि भारत को अमेरिका की ओर से अभी कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. उन्होंने यह भी बताया कि भारत और ईरान के बीच जो व्यापार होता है, वह बहुत सीमित है और ज्यादातर ह्यूमनिटेरियन ट्रेड से जुड़ा है.
ह्यूमनिटेरियन ट्रेड का मतलब ऐसे जरूरी सामानों का लेन-देन होता है, जो आम लोगों की जिंदगी के लिए जरूरी होते हैं. इसका मकसद मुनाफा कमाना या किसी देश की सैन्य ताकत बढ़ाना नहीं होता है. अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत, प्रतिबंध झेल रहे देशों को भी कुछ खास सामानों के व्यापार की अनुमति दी जाती है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि आम नागरिकों को भोजन, दवा और इलाज जैसी बुनियादी जरूरतों से वंचित न होना पड़े. इसी वजह से मानवीय व्यापार को आमतौर पर प्रतिबंधों और टैरिफ से बाहर रखा जाता है.
ह्यूमनिटेरियन ट्रेड पर टैरिफ नहीं लगाए जाने की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून है. यह कानून सरकार और आम जनता में साफ फर्क करता है. किसी भी राजनीतिक या आर्थिक टकराव में आम लोगों को सजा नहीं दी जानी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र यह भी देखता है कि प्रतिबंधों की वजह से किसी देश में भुखमरी या स्वास्थ्य संकट न पैदा हो. अगर भोजन और दवाओं की सप्लाई रोकी जाती है, तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाता है. इसी कारण इन जरूरी वस्तुओं को खास सुरक्षा दी जाती है.
भारत और ईरान के बीच जो व्यापार अभी बचा है, वह इसी सुरक्षित श्रेणी में आता है. भारत ईरान को चावल, चाय, चीनी और दूसरी जरूरी खाद्य चीजें भेजता है. इसके अलावा भारतीय दवा कंपनियां ईरान को कैंसर, डायबिटीज और दूसरी गंभीर बीमारियों की सस्ती दवाएं उपलब्ध कराती हैं. सर्जिकल और अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी इसमें शामिल हैं. चूंकि यह व्यापार पूरी तरह मानवीय जरूरतों से जुड़ा है, इसलिए इन पर अतिरिक्त टैरिफ लगने की संभावना कम मानी जा रही है.

भारत की रणनीति साफ है। वह अमेरिका के साथ टकराव से बचते हुए ईरान के साथ पुराने संबंध भी बनाए रखना चाहता है. भारत अब ईरान से कच्चा तेल नहीं खरीदता और न ही कोई सैन्य सामान भेजता है. इसी वजह से भारत का तर्क है कि उसके निर्यात पर दंडात्मक टैरिफ नहीं लगाया जाना चाहिए. साथ ही भारत यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते को आगे बढ़ा रहा है. अगर यह समझौता होता है, तो भारत को यूरोप के बड़े बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी. इससे भारत वैश्विक अनिश्चितता के बीच अपने व्यापार को संतुलित रखने की कोशिश करेगा.
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