Ram Mandir Pran Pratishtha 2nd Anniversary Today: अयोध्या में 22 जनवरी को नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ मनाई जा रही है. रामनगरी धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बन चुकी है. यहां इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन और स्थानीय लोगों की जिंदगी में बड़ा उछाल आया है. करोड़ों श्रद्धालु यहां आते हैं, जिससे शहर में खुशहाली बढ़ी है. 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या पूरी तरह बदल गई है. जानते हैं प्राण प्रतिष्ठा के बाद से राम मंदिर का स्वरूप कितना बदल गया है.
22 जनवरी 2024 को ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष के साथ जब रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी, तो ऐसा लगा मानो इतिहास ने अपनी अधूरी पंक्ति पूरी कर ली हो. सदियों का इंतज़ार, दशकों की राजनीति और वर्षों की कानूनी लड़ाई, सब एक क्षण में सिमट आए थे.
इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव
प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में विकास की रफ्तार तेज हो गई. महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन गया है, जिससे देश-विदेश से आसानी से लोग यहां पर पहुंचते हैं. रेलवे स्टेशन भी मॉर्डन हो गया है और डबल लाइन ट्रेनें चल रही हैं. पहले यहां पर सड़कें छोटी थी अब राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ जैसे चौड़े रास्ते बनाए गए हैं. अयोध्या अब देश का पहला सोलर सिटी भी बन चुकी है. यहां सुरक्षा और सुविधाएं भी बहुत बेहतर हो गई हैं.
सनातन संस्कृति, भारतीय स्थापत्य और आधुनिक व्यवस्थाओं का जीवंत प्रतीक
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर राम मंदिर एक भव्य, सुव्यवस्थित और आध्यात्मिक शक्ति से परिपूर्ण परिसर के रूप में देश-दुनिया के सामने खड़ा हुआ है. 22 जनवरी 2024 को ऐतिहासिक अनुष्ठान के साथ जिस सपने ने साकार रूप लिया था, उसने बीते दो सालों में अभूतपूर्व विस्तार और भव्यता हासिल की है. करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत से बना यह मंदिर अब केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, भारतीय स्थापत्य और आधुनिक व्यवस्थाओं का जीवंत प्रतीक बन चुका है.
जानिए कितना बदला राम मंदिर का स्वरूप
राम जन्मभूमि परिसर में मुख्य मंदिर का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जहां बाल स्वरूप रामलला श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे हैं. मंदिर के प्रथम तल पर राम परिवार की स्थापना भी हो चुकी है. लगभग 800 मीटर लंबा भव्य परकोटा भी तैयार हो गया है, जिसके भीतर 6 प्रमुख देवी-देवताओं—भगवान शंकर, गणेश, सूर्यदेव, हनुमान, माता भगवती और माता अन्नपूर्णा—के मंदिर स्थापित किए गए हैं. इन उपमंदिरों ने पूरे परिसर को एक विराट धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र का स्वरूप दिया है.
परिसर में कई छोटे मंदिरों का निर्माण
श्रीराम के जीवन से जुड़े महर्षि वाल्मीकि, विश्वामित्र, वशिष्ठ, अगस्त्य, निषादराज, अहिल्या और माता शबरी के मंदिर भी परिसर में बनकर तैयार हैं, हालांकि इन्हें अभी श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोला गया है. यह समूचा विकास श्रीराम के आदर्शों और उनके जीवन दर्शन को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है.
बुनियादी ढांचे में बड़ा परिवर्तन
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बीते दो वर्षों में बुनियादी ढांचे में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है. 100 फीट चौड़ा राम जन्मभूमि पथ, सुव्यवस्थित दर्शन मार्ग, एलईडी स्क्रीन के माध्यम से सूचना प्रसारण, स्थायी कैनोपी, शुद्ध पेयजल संयंत्र और स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था की गई है. दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर सुविधा, जूता-चप्पल और सामान रखने के लिए लॉकर, 25 हजार लोगों की क्षमता वाला तीर्थयात्री सुविधा केंद्र और आधुनिक अस्पताल भी परिसर का हिस्सा हैं.
पर्यटन में अभूतपूर्व उछाल
प्राण प्रतिष्ठा से पहले अयोध्या में सालाना कुछ करोड़ पर्यटक आते थे, लेकिन अब संख्या बहुत बढ़ गई है. 2025 में ही 23 करोड़ से ज्यादा लोग आए. यहां रोजाना 2-4 लाख लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं. आंकड़ों की मानें तो यह संख्या वाराणसी, मथुरा और आगरा से भी ज्यादा है. पर्यटन से होटल, गेस्ट हाउस, ट्रांसपोर्ट और दुकानों को फायदा हुआ है.ऐसा अनुमान है कि 2028 तक अयोध्या का पर्यटन अर्थव्यवस्था 18,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी.
आज अयोध्या केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित धार्मिक नगरी के रूप में उभर चुकी है. रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तीसरी वर्षगांठ यह दर्शाती है कि बीते दो वर्षों में राम मंदिर ने न सिर्फ आकार में, बल्कि भाव, व्यवस्था और भव्यता में भी ऐतिहासिक परिवर्तन देखा है.
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