हिंदू धर्म में कई ऐसे पर्व है, जो कि काफी अलग और अनोखे होते हैं. इसी में एक हैं मसान की होली. दरअसल, भारत में एक रंग वाली होली होती है. तो वहीं, एक मसान वाली होली होती है. रंगों वाली होली तो पूरे भारत में मनाई जाती है लेकिन मसान वाली होली केवल धर्मनगरी काशी में मनाई जाती है. मसान वाली होली मणिकर्णिका घाट पर बड़े ही धूम धाम से मनाई जाती है. इसमें लाखों की संख्या में लोग शव की राख से होली खेलते हैं. हालांकि, इस बार मसान की होली पर आपत्ति जताई गई है.
काशी विद्वत परिषद ने जताई आपत्ति
दरअसल, मसान की होली पर काशी विद्वत परिषद ने आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि ऐसी होली का उल्लेख कही भी शास्त्रों में नहीं है. लोग घाट पर मोक्ष की कामना से आते हैं. लेकिन इस प्रकार की होली से लोगों के दिलों पर हानि पहुंच सकती है. वहां पर बैठे कई लोग अपने परिवार के जाने में शोक में होते हैं. उनकी पीड़ा को उस समय कोई नहीं समझ सकता है.
सनातन धर्म को कलंकित कर देने वाला काम
ऐसे शोक वाले माहौल में नाच गान और शवों की राख से होली खेलने वाला आयोजन सनातन धर्म को कलंकित कर देने वाला काम है. हालांकि, ये पहली बार नहीं है कि इस पर आपत्ति जताई है. इससे पहले भी कई बार लोगों ने इस पर सवाल उठाए है और अमर्यादित कहा है. दरअसल, वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर हजारों और लाखों की संख्या पर लोग पहुंचते हैं. कुछ सालों में लोगों की भीड़ और ज्यादा बढ़ गई है. युवा वर्ग के लोग इस आयोजन में काफी ज्यादा अब बढ़चढ़ कर हिस्सा बनते हुए दिखाई देते हैं. जीवन और मृत्यु हर दिन होता है. ऐसे में अगर कोई परिवार वहां पर शौक के साथ आएगा और ऐसे आयोजन को देखेगा. तो उसकी भावना को काफी ज्यादा आहत होगा.
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