अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर लगभग 5 हजार ठिकानों पर हमले किए हैं. इन हमलों में ईरान के लगभग 50 जहाजों को नुकसान पहुंचा है या खत्म हो गए हैं.
ईरान में 5,000 लक्ष्यों पर हमला
अमेरिका-इजरायल और ईरान का युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहा है. अमेरिकी सेना ने ईरान के ऊपर हमले तेज कर दिए हैं. जानकारी के मुताबिक सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के लांच किए जाने के बाद पहले 10 दिनों ईरान के अंदर लगभग 5 हजार टारगेट्स के ऊपर हमला करने का दावा किया है. आपको बता दें कि इन हमलों में ईरान के कम से कम 50 जहाजों को तबाह किया जा चुका है या फिर नुकसान पहुंचा है.
अंडरग्राउंड मिसाइल लॉन्चर पर हमला
आपको बता दें कि CENTCOM ने अंडरग्राउंड मिसाइल लॉन्चर के ऊपर हमले का वीडियो भी जारी किया है. वीडियो में दिखाई दे रहा है कि प्रोजेक्टाइल के गिरते ही बड़ा धमाका होता है. इस वीडियो को जारी करते हुए पोस्ट में लिखा गया है कि ईरानी शासन अपने मिसइल लॉन्चर को छिपाने की कोशिश कर सकता है, लेकिन अमेरिका उन्हें ढूंढ़कर खत्म कर देगा.
कई महत्वपूर्ण जगहों पर हमला
इस ऑपरेशन को 28 फरवरी को ईरानी शासन की सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ने और खतरा पैदा करने वाले ठिकानों पर हमला करने के मकसद से शुरू किया गया था. अभी तक इस जंग का अंत नजर नहीं आ रहा है. CENTCOM का कहना है कि हमले लगातार जारी रहेंगे. CENTCOM ने दावा किया है कि ईरान में 5,000 लक्ष्यों पर हमला किया गया है, जिनमें ईरान सेना के कमांड और कंट्रोल सेंटर, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम, बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स, नौसेना की पनडुब्बियां और जहाज, एंटी-शिप मिसाइलें, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन बनाने वाली फैक्टरियां शामिल हैं.
अमेरिका ने तैनात किए खतरनाक हथियार
अमेरिका के हमलों के कारण ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को काफी नुकसान पहुंचा है. CENTCOM का दावा है कि ईरान की नौसेना के 50 से ज्यादा जहाजों को नुसान पहुंचा है या फिर खत्म हो गए हैं. इस ऑपरेशन के लिए अमेरिका ने कई ताकतवर हथियारों और प्लेटफॉर्म तैनात किए हैं. इन हथियारों में B-1 बॉम्बर, B-2 स्टेल्थ बॉम्बर, B-52 बॉम्बर, LUCAS ड्रोन, पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम और THAAD एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम शामिल हैं.
फाइटर जेट्स का भी हो रहा इस्तेमाल
इस ऑपरेशन में अमेरिका फाइटर जेट्स भी इस्तेमाल कर रहा है. अमेरिका F-15, F-16, F-18, F-22 जैसे खतरनाक फाइटर जेट्स का इस्तेमाल कर रहा है. इसी के साथ नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, MQ-9 रीपर ड्रोन, टैंकर एयरक्राफ्ट और कई खतरनाक हथियार भी इस ऑपरेशन का हिस्सा हैं.
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