nasa artemis ii mission: नासा का आर्टेमिस II मिशन अपने अंतिम चरण में है और ओरियन स्पेसक्राफ्ट 11 अप्रैल की सुबह सैन डिएगो के पास समुद्र में उतरेगा. वापसी के दौरान कैप्सूल को वायुमंडल की अत्यधिक गर्मी और 6 मिनट के संचार ब्लैकआउट का सामना करना होगा, जिसके बाद पैराशूट की मदद से यह सुरक्षित स्प्लैशडाउन करेगा.

nasa artemis ii mission: नासा का आर्टेमिस II मिशन अब अपने आखिरी चरण में पहुंच गया है. ओरियन स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा का चक्कर लगाकर धरती की ओर लौट रहा है. रिटर्न ट्रैजेक्टरी करेक्शन बर्न पूरा कर लिया गया है. यानी अब यान सही दिशा में पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा है. योजना के अनुसार यह 11 अप्रैल की सुबह अमेरिका के सैन डिएगो तट के पास समुद्र में उतरेगा. यह मिशन खास इसलिए है क्योंकि करीब 54 साल बाद इंसानों को चंद्रमा के पास ले जाया गया है. चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित वापसी की राह पर हैं.
लैंडिंग से पहले पूरी प्रक्रिया का सीधा प्रसारण किया जाएगा. भारत में यह प्रसारण सुबह करीब 4 बजे से देखा जा सकेगा. स्प्लैशडाउन से पहले की तैयारी, वायुमंडल में प्रवेश और समुद्र में उतरने तक के सभी दृश्य दिखाए जाएंगे. वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम मिशन कंट्रोल से हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है. दुनिया भर के लोग इस ऐतिहासिक पल का इंतजार कर रहे हैं. यह मिशन आने वाले चंद्र अभियानों के लिए रास्ता तैयार करेगा.
सबसे खतरनाक हिस्सा वायुमंडल में दोबारा प्रवेश का होता है. जैसे ही कैप्सूल धरती के वातावरण में दाखिल होगा, उसकी रफ्तार बहुत ज्यादा होगी. पहले दो मिनट में यह करीब दो लाख फीट नीचे आएगा. सामने की हवा के दबाव से तापमान लगभग 2760 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. इतनी गर्मी को झेलने के लिए ओरियन में मजबूत हीट शील्ड लगाई गई है. यह अंदर बैठे अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रखेगी.
री-एंट्री के दौरान करीब छह मिनट का कम्युनिकेशन ब्लैकआउट होगा. इसका मतलब है कि इस समय मिशन कंट्रोल और अंतरिक्ष यात्रियों के बीच संपर्क नहीं रहेगा. यह सामान्य प्रक्रिया है. तेज गति को कम करने के लिए कैप्सूल अपने थ्रस्टर्स का इस्तेमाल करेगा. वह हल्का-हल्का घूमता रहेगा ताकि अतिरिक्त ऊर्जा निकल सके. लगभग नौ मिनट बाद उसकी रफ्तार ध्वनि की गति से कम हो जाएगी.
दसवें मिनट पर ड्रोग पैराशूट खुलेंगे. इसके बाद छोटे पायलट पैराशूट और फिर मुख्य पैराशूट खुलेंगे. ये कैप्सूल को धीरे-धीरे नीचे लाएंगे. अंतिम पांच हजार फीट में इसकी गति करीब 27 किलोमीटर प्रति घंटा रह जाएगी. कुल मिलाकर 13 मिनट में कैप्सूल लगभग 2737 किलोमीटर की दूरी तय करेगा. इसके बाद वह सुरक्षित रूप से समुद्र में उतरेगा. यही पल मिशन की सफलता तय करेगा.
