al aqsa mosque closed iran: ईरान के मिसाइल हमलों के खतरे को देखते हुए इजरायल ने 1967 के बाद पहली बार रमजान और ईद के दौरान अल-अक्सा मस्जिद को बंद रखा. मस्जिद में प्रवेश न मिलने से नाराज सैकड़ों नमाजियों ने ओल्ड सिटी के गेट पर ही नमाज अदा की, जिसके कारण सुरक्षा बलों के साथ धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बनी रही.

al aqsa mosque closed iran: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब धार्मिक स्थलों पर भी दिखने लगा है. अल-अक्सा मस्जिद को युद्ध की शुरुआत के बाद से बंद कर दिया गया है. यह मस्जिद मुसलमानों के लिए बहुत पवित्र मानी जाती है. खास बात यह है कि रमजान और ईद-उल-फितर जैसे बड़े मौके पर भी इसे बंद रखा गया. 1967 के बाद यह पहली बार हुआ है, जब ऐसे समय में मस्जिद में नमाज की अनुमति नहीं दी गई.
मस्जिद बंद होने से लोगों में काफी नाराजगी और दुख है. शुक्रवार को सैकड़ों नमाजी यरूशलम के ओल्ड सिटी के गेट्स पर इकट्ठा हुए. वे अपने साथ नमाज की चटाई लेकर आए थे. लेकिन उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली. मजबूरी में लोगों ने गेट के बाहर ही नमाज अदा की. कई लोगों ने कहा कि इस बार की ईद उनके लिए बहुत दुखभरी रही.
इजरायली अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया है. उनका दावा है कि ईरान की ओर से मिसाइल हमले का खतरा बना हुआ है. इसी वजह से मस्जिद और अन्य धार्मिक स्थलों को बंद रखा गया है. साथ ही देश में 50 से ज्यादा लोगों के एक साथ जमा होने पर भी रोक लगा दी गई है. पुलिस ने बताया कि हाल ही में ओल्ड सिटी के पास मिसाइल के टुकड़े भी गिरे थे.
जब लोग मस्जिद के अंदर जाने की कोशिश करने लगे, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया. इस दौरान कुछ जगहों पर धक्का-मुक्की भी हुई. हालात संभालने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया. बाद में थोड़ी देर के लिए ढील दी गई. इसके बाद लोगों ने सड़क पर ही नमाज पढ़ी. एक इमाम ने छोटे से स्टूल पर खड़े होकर खुतबा दिया और लोगों से धैर्य रखने की अपील की.
आमतौर पर ईद के दिन यहां लाखों लोग नमाज पढ़ने आते हैं. लेकिन इस बार सिर्फ कुछ सौ लोग ही पहुंच सके. कई नमाजियों ने कहा कि अल-अक्सा के बिना रमजान अधूरा लगता है. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनकी आस्था का बड़ा हिस्सा है. इस पूरे मामले ने माहौल को और संवेदनशील बना दिया है और लोगों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है.
