प्रयागराज न्यूज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में फरार चल रहे आरोपी याकूब की गिरफ्तारी न होने पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह बेहद आश्चर्यजनक है कि जिस आरोपी को पुलिस महीनों से ‘फरार’ बता रही है, वह व्यक्ति हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर रहा है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने पुलिस को अंतिम अल्टीमेटम जारी किया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 मई को करेगा.
जानिए क्या है पूरा मामला ?
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान विवेचना अधिकारी की निष्ठा पर तीखी टिप्पणी की. बेंच ने कहा कि जांच अधिकारी अदालत को केवल गिरफ्तारी के प्रयासों की कहानियां सुना रहे हैं, जबकि हकीकत में आरोपी कानून की गिरफ्त से दूर रहकर कानूनी प्रक्रिया का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि आरोपी अदालत के साथ ‘खेल’ खेल रहा है और पुलिस तमाशबीन बनी हुई है.
कोर्ट के साथ आरोपी की ‘लुका-छिपी’
कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि पुलिस रिकॉर्ड में जो व्यक्ति भगोड़ा है, वह कानूनी दस्तावेजों और हलफनामों के जरिए अदालत की कार्यवाही में सक्रिय है. बेंच ने टिप्पणी की कि यह स्थिति कानून व्यवस्था और पुलिस की इंटेलिजेंस पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है. कोर्ट ने संकेत दिया कि पुलिस और आरोपी के बीच संभावित मिलीभगत की भी जाँच की जा सकती है.
10 दिन का अल्टीमेटम…
हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रयागराज पुलिस को आरोपी याकूब की गिरफ्तारी के लिए केवल 10 दिनों का समय दिया है. कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर निर्धारित समय के भीतर आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जाएगी. इसी क्रम में कोर्ट ने सीबीआई को मामले में पक्षकार बनाए जाने का निर्देश भी दे दिया है, जिससे पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है.
कब है अगली सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 मई को करेगा. उस दिन पुलिस को आरोपी की गिरफ्तारी की स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी. यदि पुलिस खाली हाथ रहती है, तो सीबीआई को जाँच सौंपने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू की जा सकती है.
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