जहां एक तरफ विजय के फैंस उनकी पार्टी के बहुमत प्राप्त करने के बाद में खुश होते दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में लेकिन उनके पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही है. दरअसल, बहुमत प्राप्त करने के बाद भी उनकी पार्टी के पास में सरकार बनाने लायक सीटें नहीं है.
राज्यपाल से मिल की बातचीत करने की कोशिश
दूसरी तरफ उनके विपक्षों को गठबंधन कर सरकार बनाने की बात सामने आ रही है. वहीं, विजय ने दो बार राज्यपास से मिलकर बातचीत करने की कोशिश की. हालांकि, उनकी कोशिश फेल हो गई. राज्यपाल का कहना हैं कि कांग्रेस की 5 सीटों को भी मिलाने के बाद भी उनकी पास इतनी सीटें नहीं, जिससे सरकार बनाई जा सके. उनका कहना हैं कि 113 विधायकों के साथ में एक स्थिर सरकार का गठन नहीं किया जा सकता है.
पार्टी के बीच में गठबंधन
इसी बीच DMK और AIADMK पार्टी के बीच में 2 बैठके देखने को मिली है. इसके बाद संभावना जताई जा रही है कि दोनों पार्टी गठबंधन कर सरकार बनाने की सोच रही है. दोनों पार्टी के गठबंधन करने की खबर सुनने के बाद में TVK ने अहम फैसला लिया है. दरअसल, TVK ने चेतावनी दी हैं कि अगर ऐसा हुआ तो उनके सारे विधायक सामूहिक इस्तीफा दे सकते हैं.
हालांकि, कई लोगों को इसी बीच नहीं पता कि ऐसी स्थिति में क्या होगा. आज हम आपको उसी के बारे में बताने वाले हैं. आइए जानते हैं.
अगर DMK और AIADMK के बीच गठबंधन सरकार बनती है और TVK के सारे विधायक इस्तीफा दे देते हैं. तो बता दें ऐसी स्थिति में तमिलनाडु में राजनीतिक स्थिरता आ जाएगी. क्षेत्र प्रतिनिधि न होने की वजह से वहां पर न ही अहम फैसले लिए जा सकते हैं न ही कोई नया फैसला. साथ ही विधायक के इस्तीफा देने के बाद में चुनाव आयोग को 6 महीने के अंदर-अंदर उन 108 सीटों पर चुनाव कराना होगा. अगर चुनाव में TVK फिर से उन सभी सीटों पर जीत जाती है. तो मौजूदा सरकार के लिए यह संकट पैदा कर सकता है.
इसके अलावा निर्वाचन आयोग पर अतिरिक्त बल लग सकता है. चुनाव आयोग को फिर से दोबारा से उपचुनाव कराने के कारण आर्थिक खजाने पर बोझ पड़ेगा.
अगर राज्यपाल को ऐसा महसूस होता हैं कि विधायकों के इस्तीफे के बाद में तमिलनाडु की राजनीति में स्थिरता आएगी. तो वह अनुच्छेद 356 के अनुसार राष्ट्रपति शासन की मांग कर सकता है और दोबारा से चुनाव हो सकते हैं.
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