amit shah warns data being sold to enemies: साइबर अपराध अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है और सरकार डिजिटल सुरक्षा बढ़ाने के लिए साइबर कमांडो तैयार कर रही है. डेटा चोरी और ठगी से देश और नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है.

amit shah warns data being sold to enemies: गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में साइबर अपराध और डेटा सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि आज साइबर फ्रॉड सिर्फ आम नागरिक की समस्या नहीं है, बल्कि यह नेशनल सिक्योरिटी का मुद्दा बन चुका है. डेटा चोरी, डिजिटल ठगी और साइबर हमलों का असर देश की सुरक्षा, बैंकिंग सिस्टम और नागरिकों के निजी रिकॉर्ड तक पहुंचता है. शाह ने बताया कि अब तक जांच एजेंसियों ने करीब 8,000 करोड़ रुपये साइबर अपराधियों के हाथों से बचाए हैं, जो खतरे की गंभीरता को दिखाता है.
सरकार का मानना है कि डिजिटल डेटा की सुरक्षा सिर्फ व्यक्तिगत पहचान का मामला नहीं है. बैंकिंग, टैक्स, हेल्थ और कम्युनिकेशन जैसे क्षेत्रों में मौजूद डेटा अगर गलत हाथों में चला गया तो यह देश की ताकत और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. इसलिए इसे अब केवल फ्रॉड नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला माना जा रहा है. गृह मंत्रालय ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए नई रणनीतियां बनाना शुरू कर दी हैं.
Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) और CBI मिलकर साइबर अपराध से निपटने की रणनीति तैयार कर रहे हैं. इसमें केवल नए मामलों को सुलझाना ही नहीं, बल्कि पूरे साइबर नेटवर्क और फ्रॉड सिस्टम को समझकर तोड़ने की कोशिश भी शामिल है. अधिकारियों ने माना है कि आज साइबर अपराध पेशेवर स्तर पर काम कर रहे हैं. फर्जी वेबसाइट, कॉल-फॉरवर्डिंग, म्यूल अकाउंट और सोशल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है.
साल 2023-24 में UPI से जुड़े फ्रॉड मामलों की संख्या 13.42 लाख से अधिक दर्ज हुई, जिसमें करीब 1,087 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. डिजिटल लेन-देन के कुल वॉल्यूम में भी 18,000 करोड़ रुपये से ज्यादा ट्रांजैक्शन हुए, जिनमें स्कैमर्स ने योजनाएं चलाईं. विश्लेषकों का कहना है कि अधिकतर मामलों में आम आदमी को 1 लाख से 10 लाख रुपये तक का नुकसान हुआ. यह दिखाता है कि साइबर ठगी सिर्फ बड़ी कंपनियों या शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिक के लिए भी खतरा है.
सरकार ने इस खतरे को देखते हुए साइबर कमांडो यूनिट्स की ट्रेनिंग शुरू की है. अगले कुछ सालों में करीब 5,000 कमांडो तैयार होंगे, जो रियल-टाइम में साइबर हमलों का मुकाबला कर सकेंगे. साथ ही डेटा ट्रेसिंग, फास्ट-एक्शन और नेटवर्क की जांच के लिए नए प्लेटफॉर्म्स बनाए जा रहे हैं. राज्य-स्तर पर भी कार्रवाई तेज हुई है, जैसे हाल ही में एक राज्य में 33 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और 1.13 करोड़ रुपये फ्रीज़ किए गए. सरकार का मानना है कि तकनीक, जागरूकता और जवाबदेही के जरिए ही देश की डिजिटल सुरक्षा मजबूत हो सकती है.
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