बांग्लादेश की नई रहमान सरकार: तारिक रहमान के सत्ता में आने से बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव पर विचार किया जा रहा है, और भारत के साथ राष्ट्र में सुधार की आशा की किरण जा रही है। हालाँकि बौद्धों की सुरक्षा, सीमा विवाद और शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण जैसे मुद्दे दोनों देशों के बीच तनाव की वजह बन सकते हैं।

बांग्लादेश की नई रहमान सरकार: बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। तारिक रहमान अब देश की सत्ता पर आसीन हो गए हैं। उन्हें कभी राजनीति का ‘डार्क प्रिंस’ कहा जाता था, लेकिन अब वे सबसे दिग्गज नेता के रूप में उभरकर सामने आ गए हैं। वे एक निरंकुश राजनीतिक परिवार से आये और लंबे समय से सत्ता से दूर थे। उनकी वापसी के साथ ही बांग्लादेश की राजनीति में नई दिशा की चर्चा शुरू हो गई है।
भारत ने चुनाव से पहले ही उन्हें बधाई दे दी थी। इसका साफ संकेत मिला कि भारत संबंध को फिर से सामान्य करना चाहता है। शेख़ हसीना की सत्ता से जाने के बाद दोनों देशों के अधिग्रहण में ठंडापन आ गया था। भारत की नजर में बीएनपी को हजरत-ए-इस्लामी से अधिक उदार और लोकतांत्रिक विकल्प माना जा रहा है। इसलिए नई सरकार से बेहतर होने की उम्मीद है।
तारिक रहमान करीब 17 साल बाद लंदन से डकैत। उनकी वापसी के बाद उनका रूझान सबसे पहले सामने आया। उन्होंने ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ का नारा दिया है। कहा जा रहा है कि यह अमेरिका फ़र्स्ट का फ़र्स्टपोस्ट तैयार किया गया है। उन्होंने साफ किया कि बांग्लादेश भारत, चीन और पाकिस्तान से समान दूरी है। इससे भारत को राहत मिली है।
इस समय भारत और बांग्लादेश के दो अलग-अलग दिशाओं में बढ़ते दिख रहे हैं। एक तरफ दोनों देशों के बीच लंबी सीमा, व्यापार और बिजली जैसे मजबूत संबंध हैं। दूसरी तरफ बांग्लादेश के युवा वर्ग में भारत को लेकर संदेह बढ़ा है। शेख़ ख़ुशना के भारत आने और उन्हें वापस ले जाने की मांग पर धीमी प्रतिक्रिया ने इस भावना को और पैमाने पर पहुंचा दिया। इनमें से दोनों देशों के रिश्ते में नए जोड़े भी शामिल हैं।
हाल के दिनों में बांग्लादेश में दोस्ती पर मराठा की खबरें भी सामने आई हैं. इससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता है। तारिक रहमान ने अपनी पहली किताब में कहा था कि धर्म व्यक्ति का निजी मामला है, लेकिन सब कुछ है। इससे उम्मीद है कि जगी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर ध्यान देंगी। हालाँकि सीमा विवाद, पानी के रिश्ते और शेख़ हसीना के प्रत्यय द्रोण जैसे मुद्दे अभी भी आकर्षक बने हुए हैं। आने वाला समय बताता है कि दोनों देशों के भिन्न-भिन्न दिशा में जाते हैं।
