कांग्रेस में अक्सर आंतरिक विवाद सार्वजनिक रूप से बाहर आ जाते हैं, वहीं बीजेपी में ऐसा बेहद कम देखने को मिलता है. ऐसा क्यों होता है? रिपोर्ट में पढ़ें-
बीजेपी में नहीं दिखता सार्वजनिक कलह
देश की राजनीति में इन दिनों कई सवाल उठ रहे हैं. मिडिल ईस्ट की जंग हो चाहें कोई और वैश्विक मुद्दा, देश की राजनीति में इन दिनों लगातार एक सवाल बार-बार उठ रहा है. सवाल है कि आखिर बीजेपी में कांग्रेस की तरह खुली बगावत या फिर कलेश क्यों देखने को नहीं मिलता है. आखिर पार्टी के विधायक और सांसद खुले आम पार्टी का विरोध क्यों नहीं करते हैं. जबकि हमें कांग्रेस के अंदर अक्सर कलेश दिखाई देता रहता है.
अनुशासन से काम करती पार्टी
बीजेपी और कांग्रेस की राजनीति में काफी अंतर है. बीजेपी में कांग्रेस की तरह खुली बगावत देखने को नहीं मिलती है. इस सवाल का सबसे बड़ा जवाब संघ है. बीजेपी की जड़ें RSS से जुड़ी हुई हैं, जो अनुशासन के साथ काम करता है. पार्टी के अंदर चाहे भले ही कितना असंतोष हो जाए, लेकिन उसे सार्वजनिक होने से पहले ही संगठनात्मक स्तर पर संभाल लिया जाता है.
कांग्रेस में नहीं है समांतर अनुशासन
आपको बता दें कि प्रचारक और वरिष्ठ कार्यकर्ता नाराज नेताओं से बात करके मामला शांत करा लेते हैं, जिसके कारण नाराजगी होते हुए भी काफी कम खुली बगावत देखने को मिलती है. वहीं अगर बात करें कांग्रेस की तो उस पार्टी में किसी तरह का समांतर अनुशासन नहीं है, जिसके कारण अंदर की नाराजगी अक्सर सभी के सामने आ जाती है.
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विचारधाराओं में अंतर
बीजेपी पार्टी हिंदुत्व की विचारधारा के साथ काम करती है, जिसके चलते पार्टी के नेता और कार्यकर्ता एक साथ रहते हैं. पार्टी का कैडर-बेस्ड ढांचा लंबे समय तक विचारधारा के लिए प्रतिबद्धता सिखाता है. वहीं कांग्रेस के अंदर अलग-अलग विचार धाराओं में काम किया जाता है. जिसके चलते पार्टी की एकजुटता कम पड़ जाती है. इसी कारण पंजाब, राजस्थान और कई राज्यों से विवाद अक्सर सामने आते रहते हैं.
बीजेपी पार्टी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने एक सशक्त केंद्रीय नेतृत्व को स्थापित कर दिया है. पार्टी में फैसले लेने की प्रक्रिया केंद्रीकृत है, लेकिन जमीनी स्तर की फीडबैक को भी काफी महत्व दिया जाता है. पार्टी के अंदर के कलह को आंतरिक बैठकों में ही सुलझा लिया जाता है. नाराज नेताओं को संगठनात्मक रूप से साधा लिया जाता है, अगर ऐसा नहीं होता है, तो बिना सार्वजनिक विवाद के राजनीतिक रूप से किनारे कर दिया जाता है.
कांग्रेस का नेतृत्व कमजोर
कांग्रेस में बीजेपी से बिल्कुल अलग स्थिति है. कांग्रेस में नेतृत्व को कमजोर माना जाता है और क्षेत्र के नेता ज्यादा प्रभावशाली हो जाते हैं. जिसके कारण अक्सर पार्टी के अंदर के कलह बाहर आ जाते हैं. वहीं बीजेपी में पार्टी को छोड़ना अक्सर राजनीतिक भविष्य के ऊपर खतरा माना जाता है. इसके साथ ही पार्टी का ग्राउंड नेटवर्क भी नेताओं को अलग-अलग होने से रोके रहता है.
राजस्थान और पंजाब हैं उदाहरण
कांग्रेस पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र ज्यादा है, लेकिन नाराजगी अक्सर सार्वजनिक हो जाती है. राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच के विवाद हो या फिर पंजाब के अंदर अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच का विवाद हो. ये सभी विवाद कांग्रेस में नाराजगी सार्वजनिक होने के उदाहरण हैं. हालांकि बीजेपी और कांग्रेस की विचारधारा और अनुशासन सहित कई चीजों का अंतर है, जिसके चलते कांग्रेस में नाराजगी अक्सर सार्वजनिक रूप से बाहर आ जाती है.
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