उत्तराखंड की धामी सरकार ने एक समावेशी और जन-केंद्रित बजट 2026-27 तैयार करने की दिशा में एक बड़ी पहल की है. मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर सरकार ‘आम लोगों की राय’ के आधार पर बजट का खाका तैयार कर रही है, ताकि विकास की योजनाओं में जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित हो सके.
Uttarakhand Budget Session 2026: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैण) एक बार फिर सियासी हलचल का केंद्र बनने जा रही है. 9 से 13 मार्च तक चलने वाले बजट सत्र में 11 मार्च को सीएम पुष्कर सिंह धामी वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे. 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह धामी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा, इसलिए हर घोषणा और हर आंकड़े पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं. इससे पहले सीएम धामी संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पौड़ी पहुंचे.रांसी मैदान में सीएम धामी का हेलिकॉप्टर उतरा. यहां सीएम के पहुंचते ही पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया.
कुमाऊं और गंढ़वाल मंडल के लोगों से सीएम धामी का संवाद
2026 _ 27 से आम बजट को लेकर सरकार तैयारी कर रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कुमाऊं गढ़वाल दोनों मंडलों में आम लोगों से बजट को लेकर संवाद किया. आज पौड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आम लोगों के साथ संवाद किया. भाजपा प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन का कहना है कि जिस तरह से सरकार आम लोगों के राय शुमारी के आधार पर बजट तैयार करेगी. जो उत्तराखंड के आम लोगों के हितों में होगा उसके लिए सरकार बजट बनाएगी.
बजट में शामिल होंगे आम सुझाव
आम जन के सुझावों को भी बजट में शामिल किया जा रहा है. आमजन, बुद्धिजीवियों, युवा और व्यापारियों से मिले सुझावों को राज्य के आगामी बजट में प्राथमिकता से शामिल किया जा रहा है. सीएम धामी के नेतृत्व में बजट निर्माण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जा रहा है.
बजट सत्र का विस्तृत कार्यक्रम
प्रमुख सचिव धनंजय चतुर्वेदी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार:
9 मार्च (सोमवार): राज्यपाल का अभिभाषण
10 मार्च (मंगलवार): अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव व चर्चा
11 मार्च (बुधवार): वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुतीकरण
12-13 मार्च (गुरुवार-शुक्रवार): बजट पर सामान्य चर्चा व अनुदान मांगों पर मतदान
विपक्ष तैयार, मुद्दे भी तय
गैरसैंण की ठंड में इस बार सियासी गर्मी देखने को मिल सकती है. विपक्ष बेरोजगारी, पलायन और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है. बजट का आकार बढ़ाना जितना आसान दिखता है, उतना है नहीं क्योंकि बड़ी राशि वेतन, पेंशन और कर्ज अदायगी में चली जाती है. ऐसे में घाटा नियंत्रित रखते हुए विकास को रफ्तार देना सरकार की असली चुनौती होगी.
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