दिल्ली सरकार को दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से फटकार लगाई गई है. यह डांट OBC आरक्षण के नियमों में सरकार की कार्यप्रणाली पर लगाई गई है. अदालत ने कहा कि सरकार ने एक के बाद एक नोटिफिकेशन, सर्कुलर और पत्र जारी कर उम्मीदवारों में यह भ्रम पैदा कर दिया, जिसकी वजह से समझना बिल्कुल मुश्किल हुआ कि आखिर OBC के नियमों का असली हकदार कौन है.
दरअसल, यह मामला तब आया जब दिल्ली हाईकोर्ट में एक व्यक्ति ने याचिका दायर कर मामले की जानकारी दी. उसका कहना था कि वह उस भर्ती के आवेदन का हकदार है, लेकिन उसकी उम्मीदवारी को दिल्ली सरकार ने खारिज कर दिया. याचिका में माना गया कि व्यक्ति OBC का है. हालांकि, उसका OBC प्रमाणपत्र दिल्ली से जारी होना चाहिए था. उम्मीदवार के द्वारा दिया गया प्रमाणपत्र उसके पिता को बिहार भवन से मिला था. भर्ती विज्ञापन में दिल्ली सरकार द्वारा जारी प्रमाणपत्र होना चाहिए. इसी कारण से व्यक्ति की याचिका को खारिज कर दिया. दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को भी फटकार लगाई.
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने एक के बाद एक इतने सारे पत्र, नोटिफिकेशन और सर्कुलर जारी किए है कि उम्मीदवार के साथ अदालत के लिए भी यह समझना मुश्किल हो गया है. अस्पष्ट वाले विज्ञापनों ने पूरे सिस्टम को उलझा कर रख दिया है. उम्मीदवार से यह उम्मीद न की जाए कि वह पुराने नोटिफिकेशन और सर्कुलर को खोज के अपनी पात्रता को तय करेगा. ऐसा करने अनुचित के साथ कानूनी के लिए भी अच्छा नहीं होगा.
भर्ती विज्ञापन में पात्रता को सीधे शब्दों में लिखा जाना चाहिए. सिर्फ यह लिखना कि समय-समय पर पर जारी निर्देश के अनुसार होगा, उचित नहीं होगा. उन्होंने दिल्ली सरकार से आरक्षण और भर्ती से जुड़े नियमों को सरल और साफ शब्दों में जारी करने के लिए कहा है.
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