Allahabad high court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 हजार की इनामी देवरिया की तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है. कोर्ट ने भ्रष्टाचार और सरकारी तंत्र में अवैध वसूली को लेकर कड़ी टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी कार्यालयों को “आदेश बेचने की खुली दुकान” नहीं बनने दिया जा सकता. टीचर कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या मामले में अग्रिम जमानत याचिका खारिज हुई है. जस्टिस विक्रम डी चौहान की सिंगल बेंच ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज की है.
लंबे समय से फरार, 25 हजार का इनाम घोषित
पूर्व बीएसए शालिनी श्रीवास्तव लंबे समय से फरार चल रही है. गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी कोर्ट में पेश नहीं होने पर पुलिस ने उनके ऊपर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया. पुलिस लगातार शालिनी श्रीवास्तव की तलाश में लगी है.
‘आदेश बेचने की खुली दुकान’ नहीं बनने दिया जा सकता-हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी कार्यालयों को आदेश बेचने खुली दुकान नहीं बनने दिया जाएगा. तत्कालीन बीएसए के ऊपर लगाए आरोपों को हाईकोर्ट ने गंभीर माना है. कोर्ट ने कहा है कि मामले की जांच में साक्ष्य भी याची के विरुद्ध पाए गए हैं.
जानिए क्या है पूरा मामला
देवरिया के कृष्ण मोहन सिंह, ओंकार सिंह और अपर्णा तिवारी 2016 में सहायक शिक्षक नियुक्त हुए थे. फिर बाद में इनकी नियुक्तियों को निरस्त कर दिया गया. जिसके बाद तीनों की तरफ से हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर चुनौती दी गई. फरवरी 2025 में नियुक्ति निरस्त करने के आदेश को हाईकोर्ट ने रद्द करते हुए पुनर्विचार का आदेश दिया. हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए बीएसए पर याचियों से 16- 16 लाख रुपए लेने का आरोप है. रुपए लेने के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने के चलते कृष्ण मोहन सिंह ने आत्महत्या कर ली. मृतक की पत्नी ने इन्हीं आरोपों को लेकर तत्कालीन बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई. कोर्ट ने फिलहाल सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले में याची को अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया.
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