देहरादून: उत्तराखंड के हजारों राशन डीलरों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी और बेहद राहत भरी घोषणा की है. सरकार ने राशन डीलरों के लाभांश (कमीशन) में सीधी बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है. इस फैसले से न केवल डीलरों को आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रदेश के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों तक फैली राशन वितरण व्यवस्था भी और अधिक सुदृढ़ होगी.
क्या है नई घोषणा?
केंद्र सरकार ने पर्वतीय राज्यों के लिए खाद्यान्न वितरण पर मिलने वाले लाभांश में वृद्धि की है. इस फैसले के तहत, अब उत्तराखंड के राशन डीलरों को प्रति कुंतल 180 के बजाय 195 का लाभांश मिलेगा. यानी प्रति कुंतल 15 की सीधी बढ़त की गई है. कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गई हैं. इस निर्णय से राज्य के 9 हजार से अधिक राशन डीलरों को सीधा लाभ पहुँचेगा.
लाभांश में ₹15 की सीधी बढ़ोतरी, 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी
केंद्र सरकार ने पर्वतीय राज्यों के भौगोलिक हालातों को देखते हुए खाद्यान्न वितरण पर मिलने वाले लाभांश में वृद्धि की मंजूरी दी है। इस नए फैसले के तहत, अब उत्तराखंड के राशन डीलरों को प्रति कुंतल ₹180 के बजाय ₹195 का लाभांश मिलेगा.डीलरों को प्रति कुंतल ₹15 की सीधी बढ़त का लाभ मिलेगा.
प्रभाव
प्रदेश की खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी हो चुकी हैं. इस निर्णय से उत्तराखंड के 9 हजार से अधिक राशन डीलरों को सीधा आर्थिक लाभ पहुँचेगा.
पीओएस (POS) मशीन से वितरण पर मिलेगा अतिरिक्त बोनस
राशन वितरण प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, आधुनिक और रिसाव-मुक्त (Leakage-free) बनाने के लिए सरकार ने एक और बड़ा प्रोत्साहन जोड़ा है। यदि राशन डीलर पीओएस (Point of Sale) मशीन के माध्यम से खाद्यान्न का वितरण करते हैं, तो उन्हें ₹11 प्रति कुंतल का अतिरिक्त मार्जिन दिया जाएगा। इस प्रोत्साहन राशि के जुड़ने से डीलरों की मासिक आय में अच्छी-खासी वृद्धि देखने को मिलेगी।
केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे 75:25 के अनुपात में खर्च
इस नई लाभांश नीति को धरातल पर उतारने के लिए होने वाले कुल अतिरिक्त वित्तीय खर्च की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी. 75 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा. 25 फीसदी हिस्सा उत्तराखंड राज्य सरकार अपने बजट से देगी.
वितरण व्यवस्था पर क्या होगा असर?
पिछले काफी समय से बढ़ती महंगाई और परिवहन खर्च का हवाला देकर राशन डीलर अपने लाभांश को बढ़ाने की मांग कर रहे थे. डीलरों का मानना था कि पुराना कमीशन मौजूदा खर्चों के मुकाबले काफी कम था.
खाद्य क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार के इस कदम से डीलरों की आर्थिक चिंताएं दूर होंगी. जब राशन वितरण नेटवर्क से जुड़े डीलर आर्थिक रूप से सशक्त और संतुष्ट होंगे, तो वे खाद्यान्न वितरण के कार्य को अधिक जिम्मेदारी, पारदर्शिता और निष्ठा के साथ पूरा करेंगे. इसके परिणामस्वरूप सरकारी राशन योजनाओं का लाभ राज्य के अंतिम छोर पर खड़े गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा.
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