उत्तराखंड में हो रही बारिश की वजह से लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई है. मसूरी के पास में स्थित खेतवाला गांव के लोगों की मुश्किलें तो और ज्यादा बढ़ते जा रही है. दरअसल, एक करोड़ रुपये की लागत से बना हुआ सड़क से निकला मलबा और भूस्खलन गांव के लिए बड़ी परेशानी बन दया है. सड़कों पर होने वाले भारी बोल्डर से गांव का संपर्क पूरी तरीके से बंद हो चुका है. गाड़ियों की आवाजाही भी पूरी तरीके से खत्म हो चुकी है. गांव वालों के दैनिक कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है.
इसी बीच यहां की महिलाओं ने बड़ा कदम उठाया है. दरअसल, महिलाओं ने जंगल की झाड़ियों की काट कर पैदल चलने का रास्ता बनाया है. महिलाओं के इस काम से बच्चों का स्कूल से आना जाना और रोजाना की होने वाली आवाजाही आसान हो चुकी है. हालांकि, गाव वालों ने आरोप लगाया कि सड़क को बनाते समय मलबे का वैज्ञानिक तरीके से समाधान नहीं किया गया था, जिसकी वजह से पहली बारिश में ही मलबा बहकर गार्डन मार्ग और आसपास के इलाकों में आ गया. मलबा रिस्पना नदी तक पहुंच रहा है, जिसकी वजह से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है. भूस्खलन को रोकने के लिए बनाई गई सुरक्षा निर्माण की दीवार भी कुछ ही महीने में ढह गई थी.
16 सितंबर 2025 को आपदा में बेकार हुई पेयजल लाइन भी अभी तक ठीक नहीं हुई. सड़क के बंद होने के साथ-साथ पेयजल का संकट भी गहरा गया है. शिकायत के बाद में जेसीबी को भी भेजा गया था, लेकिन राहत और बचाव कार्य भी धीमी गति से चल रहा है. कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को भी इसके लिए ज्ञापन सौंपा गया था. हालांकि, मंत्री के निर्देश के बाद भी अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. लगातार होते भूस्खलन से ग्रामीण पूरी तरीके से दहशत में दिखाई दे रहे हैं. कई तो पलायन भी कर चुके है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द से जल्द कुछ नहीं किया गया तो बड़ा हादसा भी हो सकता है.
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